आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
राजस्थान के धौलपुर जिले के भवुतीपुरा गांव में बुधवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कुख्यात डकैत जगन गुर्जर का अंतिम संस्कार किया गया।
अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जगन के तीनों भाइयों (पप्पू गुर्जर, लाल सिंह और पान सिंह) को अलग-अलग पुलिस टीम की निगरानी में जेल से भवुतीपुरा लाया गया। पप्पू गुर्जर जहां अजमेर जेल में कैद है, वहीं लाल सिंह और पान सिंह धौलपुर जेल में बंद हैं।
जगन के अंतिम संस्कार के दौरान गांव में अजमेर जेल प्रशासन, धौलपुर विशेष कार्य बल (एसटीएफ) और धौलपुर पुलिस की कई टीम तैनात की गई थीं।
इससे पहले बुधवार सुबह जगन का शव अजमेर से उसके पैतृक गांव ले जाया गया।
जगन की 29 जून को अजमेर की उच्च सुरक्षा वाली जेल में बंद एक अन्य कैदी विष्णु ने कथित तौर पर तौलिये से गला घोंटकर हत्या कर दी थी।
घटना के बाद जगन के परिजन ने मंगलवार को अजमेर के जवाहर लाल नेहरू अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर धरना दिया और उसका शव लेने से इनकार कर दिया। हालांकि, बाद में पुलिस और प्रशासन के साथ बातचीत के बाद परिजन उसका शव लेने के लिए राजी हो गए।
जगन के परिजन उसकी हत्या से जुड़े मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग कर रहे हैं।
इस बीच, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) के संयोजक और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की।
बेनीवाल ने कहा, “सिर्फ विभागीय जांच से निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सच्चाई सामने आना संभव नहीं है। मैं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से अपील करता हूं कि वह तत्काल सीबीआई जांच के आदेश दें, ताकि इस घटना के पीछे की साजिश और जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका उजागर हो सके।”
बेनीवाल ने आरोप लगाया कि राजस्थान की जेल के भीतर से रंगदारी, मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध संचालित होने की घटनाएं बार-बार सामने आती रही हैं।
उन्होंने कहा, “ऐसा प्रतीत होता है कि कई माफिया गिरोह और शातिर अपराधी जेल के भीतर से समानांतर आपराधिक नेटवर्क चला रहे हैं, जो कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है।”