चेन्नई
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को आरोप लगाया कि संसद में परिसीमन से जुड़े विधेयक को विपक्ष ने “भारत की अवधारणा” की रक्षा के लिए खारिज किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला देश के संघीय ढांचे को बचाने के लिए लिया गया है।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले पोन्नेरी में अपनी पहली रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार 16 अप्रैल को एक नया विधेयक लेकर आई थी, जिसे महिला आरक्षण से जुड़ा बताया गया। लेकिन असल में इसके पीछे परिसीमन का मुद्दा छिपा हुआ था।
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार का दावा था कि वह महिला आरक्षण लागू करना चाहती है। लेकिन उनके अनुसार यह कानून पहले ही 2023 में पारित हो चुका था। उन्होंने कहा कि नए प्रस्ताव के जरिए कुछ और राजनीतिक उद्देश्य साधे जा रहे थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस विधेयक के जरिए तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों का संसद में प्रतिनिधित्व कम करने की कोशिश की जा रही थी। उनके अनुसार यह कदम छोटे राज्यों और पूर्वोत्तर राज्यों की राजनीतिक ताकत को भी कमजोर कर सकता है।
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष ने इसी कारण इस विधेयक को संसद में नामंजूर किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला किसी पार्टी के खिलाफ नहीं बल्कि संविधान और देश की संरचना की रक्षा के लिए लिया गया।
उन्होंने कहा कि भारत राज्यों का एक संघ है और हर राज्य को अपनी आवाज रखने का अधिकार है। राज्यों को अपनी परंपराओं और पहचान को बचाने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
अपने भाषण में राहुल गांधी ने भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पार्टी एक ऐसे भारत की कल्पना कर रही है जहां कुछ बड़ी कंपनियां पूरे सिस्टम को नियंत्रित करें।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सामाजिक न्याय और राज्यों के अधिकारों से जुड़े विचारों को कमजोर करना चाहती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस तरह की सोच के खिलाफ खड़े हों।
राहुल गांधी ने तमिलनाडु की क्षेत्रीय राजनीति का जिक्र करते हुए अन्नाद्रमुक पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह पार्टी अब पहले जैसी नहीं रही और भाजपा के प्रभाव में काम कर रही है।
उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार के दबाव में अन्नाद्रमुक की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान कमजोर हुई है। हालांकि उन्होंने कांग्रेस को एक ऐसा दल बताया जो अपने सहयोगियों को बराबरी का सम्मान देता है।
राहुल गांधी ने कहा कि यह लड़ाई केवल चुनाव की नहीं बल्कि विचारधारा की भी है। यह दबाव की राजनीति और सहमति की राजनीति के बीच संघर्ष है।उन्होंने कहा कि तमिल भाषा और संस्कृति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता। यह भाषा हजारों साल के इतिहास और अनुभव को समेटे हुए है।
रैली के अंत में उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री “एक देश, एक नेता, एक भाषा” की बात करते हैं, तो यह संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने दोहराया कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता और संघीय ढांचा है।