पहलगाम हमले की बरसी पर सख्त कार्रवाई की मांग

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 18-04-2026
Demand for Strict Action on Anniversary of Pahalgam Attack
Demand for Strict Action on Anniversary of Pahalgam Attack

 

श्रीनगर

पहलगाम आतंकी हमले की बरसी के मौके पर आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज के निदेशक जुनेद कुरैशी ने कहा कि कश्मीर में शांति और विकास को बाधित करने वाली आतंकी गतिविधियों और उनके नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई जरूरी है।

उन्होंने कहा कि चाहे स्थिति को किसी भी तरह प्रस्तुत किया जाए, सच्चाई को स्वीकार करना होगा। उन्होंने 22 अप्रैल 2025 को बाईसरन घाटी में हुए हमले को टूरिस्टों पर लक्षित हिंसा बताया। इस हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी। आतंकियों ने पहचान सुनिश्चित करने के बाद गोलीबारी की थी। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर ए तैयबा और उसके सहयोगी संगठन ने ली थी।

कुरैशी ने आरोप लगाया कि ऐसे आतंकी संगठन बाहरी समर्थन से संचालित होते हैं। उन्होंने कहा कि इन्हें प्रशिक्षण और वित्तीय मदद पाकिस्तान से मिलती है। उनके अनुसार इन घटनाओं का उद्देश्य जम्मू कश्मीर में शांति प्रक्रिया और विकास को नुकसान पहुंचाना है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाओं का सबसे बड़ा असर कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। पर्यटन उद्योग को भारी नुकसान हुआ है। कई व्यवसाय प्रभावित हुए हैं और रोजगार के अवसर घटे हैं। निवेश पर भी नकारात्मक असर पड़ा है।

उन्होंने भारत की प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि हमले के बाद द्विपक्षीय संबंधों में कई बदलाव देखने को मिले हैं। उन्होंने सिंधु जल संधि और आतंकवाद विरोधी अभियानों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार भारत आतंकवाद के ढांचे पर कार्रवाई करने में सक्षम है और जरूरत पड़ने पर कदम उठाता रहेगा।

कुरैशी ने कश्मीरी समाज की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि समाज को स्पष्ट रूप से आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ खड़ा होना होगा। उन्होंने दावा किया कि कश्मीर के लोग ऐसे विचारों का समर्थन नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा कि इस्लाम के नाम पर हिंसा को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने आगे कहा कि केवल सोशल मीडिया पर निंदा करना पर्याप्त नहीं है। लोगों को सार्वजनिक रूप से सामने आकर विरोध दर्ज कराना चाहिए। उन्होंने आतंकवाद से जुड़े विचारों को सामाजिक रूप से अलग-थलग करने की अपील की।

कुरैशी ने कहा कि केवल सुधार या पुनर्वास पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार आतंकवादी विचारधारा का पूरी तरह खात्मा जरूरी है। उन्होंने कहा कि समाज को सक्रिय होकर ऐसे तत्वों को अस्वीकार करना होगा।

उन्होंने अपने बयान के अंत में कहा कि कश्मीरियों को दुनिया के सामने यह स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि आतंकवाद उनके नाम पर नहीं है। उन्होंने कहा कि यह समय है जब समाज एकजुट होकर शांति, स्थिरता और आतंक के खिलाफ मजबूत संदेश दे।