जम्मू
पाकिस्तान में करीब एक सदी पुराने हिंदू मंदिर के ध्वस्तीकरण को लेकर जम्मू में राष्ट्रीय बजरंग दल ने मंगलवार को विरोध प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए और पुतला फूंका। प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान के झंडे और कुछ पाकिस्तानी नेताओं की तस्वीरें भी दिखाई गईं।
राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रदेश अध्यक्ष राकेश बजरंगी ने कहा कि पाकिस्तान के सिराज गांव में स्थित यह हिंदू मंदिर करीब 100 से 130 वर्ष पुराना था। उनके अनुसार मंदिर को कथित तौर पर इसलिए गिराया गया क्योंकि उसके पास एक मदरसा मौजूद है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर की जमीन को मदरसे के इस्तेमाल में लाने की कोशिश की गई।
राकेश बजरंगी ने पाकिस्तान में हिंदू धार्मिक स्थलों और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से हिंदू महिलाओं के अपहरण, हिंदुओं पर हमलों और धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने की खबरें समय समय पर सामने आती रही हैं।
उन्होंने भारत सरकार से पाकिस्तान पर दबाव बनाने की मांग की। बजरंगी ने कहा कि मंदिर को उसके मूल स्वरूप में दोबारा बनाया जाना चाहिए और धार्मिक स्थल की जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सिराज गांव का यह मंदिर 21 अगस्त को ढह गया था। हालांकि मंदिर के गिरने की वजह को लेकर अलग अलग दावे सामने आए हैं। अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए काम करने वाले पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी ने आरोप लगाया कि मंदिर की इमारत को जानबूझकर गिराया गया। संगठन ने दावा किया कि इससे जुड़े निर्माण और अन्य सामान को भी वहां से हटा दिया गया।
पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी के अध्यक्ष असलम परवेज सहोत्रा के अनुसार, उन्होंने 28 अगस्त को पंजाब के अतिरिक्त गृह सचिव से मुलाकात कर लिखित शिकायत दी थी। उन्होंने मंदिर को गिराने के लिए जिम्मेदार लोगों और धार्मिक स्थल की सुरक्षा में कथित लापरवाही करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
सहोत्रा ने यह भी दावा किया कि मंदिर से सटी जमीन पहले एक मदरसे को लीज पर दी गई थी। किराया नहीं मिलने और जमीन का निर्धारित उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं होने के कारण लीज रद्द कर दी गई थी। उनके अनुसार बाद में संपत्ति के कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जे की शिकायत सामने आई।
उन्होंने राजस्व विभाग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मंदिर परिसर के कुछ हिस्सों में अवैध कब्जेदारों की पहचान की गई थी। उनके मुताबिक, सियालकोट में एवेक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के उप प्रशासक ने जनवरी में मदरसे की लीज रद्द करने और अवैध कब्जेदारों को हटाने का आदेश दिया था। उनका दावा है कि यह आदेश लागू नहीं हुआ।
हालांकि, एवेक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के अधिकारी इफ्तिखार राणा ने मंदिर को गिराए जाने के आरोप से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि भारी बारिश के कारण मंदिर की पुरानी इमारत ढह गई।
राणा के मुताबिक, सरकारी रिकॉर्ड में मंदिर का कोई नाम दर्ज नहीं है। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि इमारत काफी पुरानी थी और उसकी उम्र 100 से 125 वर्ष से अधिक हो सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर की अपनी जमीन किसी मदरसे को लीज पर नहीं दी गई थी। मंदिर की बहाली को लेकर अंतिम फैसला एवेक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड करेगा।
मंदिर कहां स्थित था?
मंदिर पाकिस्तान के सिराज गांव में स्थित बताया गया है।
मंदिर कितना पुराना था?
विभिन्न दावों के अनुसार मंदिर 100 से 130 वर्ष पुराना था।
मंदिर कब गिरा?
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मंदिर की इमारत 21 अगस्त को ढही।
विवाद की वजह क्या है?
अल्पसंख्यक अधिकार संगठन ने इसे कथित रूप से जानबूझकर गिराए जाने का आरोप लगाया है। वहीं एवेक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के अधिकारी ने भारी बारिश को इमारत गिरने की वजह बताया है।
जम्मू में प्रदर्शन क्यों हुआ?
राष्ट्रीय बजरंग दल ने मंदिर के ध्वस्तीकरण के विरोध में प्रदर्शन किया और भारत सरकार से पाकिस्तान पर दबाव बनाने की मांग की।
क्या मंदिर दोबारा बनाया जाएगा?
एवेक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के अधिकारी के अनुसार मंदिर की बहाली को लेकर बोर्ड फैसला करेगा।