हैदराबाद
उर्दू पत्रकारिता में आज भी काम करने की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। इसके साथ ही इस क्षेत्र में नए प्रयोग भी किए जा सकते हैं। जरूरत केवल बदलते समय और पाठकों की रुचि को समझने की है। यह बात बीबीसी उर्दू के वरिष्ठ प्रोड्यूसर महताब आलम ने कही।
महताब आलम मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग की ओर से आयोजित ‘इजहार ए खयाल’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने उर्दू पत्रकारिता की मौजूदा स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि उर्दू पत्रकारिता को भाषा और साहित्य से जुड़े विवादों तक सीमित रखने के बजाय पेशेवर नजरिए से आगे बढ़ाने की जरूरत है। उर्दू भारत में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में सातवें स्थान पर है। इसके पाठक केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। दुनिया के कई देशों में उर्दू पढ़ने और समझने वाले लोग मौजूद हैं।
महताब आलम ने कहा कि बड़ी संख्या में उर्दू पाठक अपनी रुचि की खबरों और उपयोगी जानकारी के लिए दूसरी भाषाओं की पत्रकारिता पर निर्भर हैं। ऐसे में उर्दू में ताजा, विश्वसनीय और उपयोगी सामग्री तैयार करने की बड़ी गुंजाइश है। अगर पाठकों की जरूरत के अनुसार सामग्री उपलब्ध कराई जाए तो उसे व्यापक स्वीकार्यता मिल सकती है।
उन्होंने पत्रकारिता के विद्यार्थियों से कहा कि उन्हें उर्दू पाठकों की पसंद और नापसंद पर गंभीरता से शोध करना चाहिए। यह समझना जरूरी है कि पाठक किस तरह की खबरें पढ़ना चाहते हैं। किन विषयों पर उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं मिल रही है। इसी आधार पर सामग्री तैयार करने से उर्दू पत्रकारिता का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
महताब आलम ने विद्यार्थियों को संसाधनों की कमी और उर्दू पत्रकारिता की समस्याओं का केवल उल्लेख करते रहने के बजाय नए अवसर तलाशने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को यह देखना चाहिए कि किन विषयों और क्षेत्रों में उर्दू पाठकों और श्रोताओं को उनकी पसंद का पर्याप्त कंटेंट नहीं मिल रहा है। यही क्षेत्र उनके लिए नए अवसर पैदा कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि उर्दू पत्रकारिता के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू हैं। चुनौतियों को समझना जरूरी है, लेकिन भविष्य की दिशा तय करते समय सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
कार्यक्रम की शुरुआत विभाग की शोधार्थी सादिया नज्जार के प्रारंभिक संबोधन से हुई। इसके बाद सहायक प्रोफेसर ताहिर कुरैशी ने अतिथि वक्ता महताब आलम का स्वागत किया।
कार्यक्रम के अंत में शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने पत्रकारिता से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे। महताब आलम ने उनके सवालों के विस्तार से जवाब दिए।
इस अवसर पर जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के एसोसिएट डीन प्रोफेसर मोहम्मद फरयाद, सहायक प्रोफेसर हुसैन अब्बास रिजवी, डॉ. मेराज अहमद, गेस्ट फैकल्टी डॉ. दानिश खान और डॉ. फसीहुद्दीन मौजूद रहे। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद मुस्तफा अली सरवरी ने अंत में धन्यवाद ज्ञापित किया।