गर्तला (त्रिपुरा)
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने गुरुवार को अगर्तला स्थित प्रज्ञा भवन में आयोजित एक दिवसीय पूर्वोत्तर क्षेत्रीय सम्मेलन में बच्चों के अधिकारों पर अपनी बात रखी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साहा ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है क्योंकि बच्चे ही राष्ट्र का भविष्य हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बच्चे समाज की नींव हैं और उनके अधिकारों की रक्षा केवल सरकारों या संस्थानों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवारों, समुदायों और पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।
त्रिपुरा में लिए गए प्रयासों को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 2022 से 2025 के बीच लगभग 28 बच्चों को कानूनी दत्तक ग्रहण के माध्यम से प्रेमपूर्ण परिवार मिले हैं।
कार्यक्रम में सामाजिक कल्याण एवं सामाजिक शिक्षा मंत्री टिंकू रॉय, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की अध्यक्ष त्रिप्ती गुहा, सामाजिक कल्याण एवं सामाजिक शिक्षा विभाग के सचिव तापस रॉय और निदेशक तपन कुमार दास भी मौजूद थे।
इसी दौरान, अगर्तला के होटल पोलो टावर में पूर्वोत्तर राज्यों के लिए एकीकृत कृषि क्लस्टर पर राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि त्रिपुरा में लगभग 1,08,281 महिलाएं, जो अनुमानित लक्षित 'दिदी' का लगभग 95 प्रतिशत हैं, 'लाखपति दिदी' बन चुकी हैं।उन्होंने कहा कि कृषि देश और उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, साथ ही यह ग्रामीण परिवारों का जीवन-धारा भी है।
सीएम ने बताया कि महिलाओं के स्वरोजगार समूहों के सदस्यों की आजीविका को मजबूत करने के लिए भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा दी गईंदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत एकीकृत कृषि क्लस्टर (IFC) दृष्टिकोण को लागू किया गया है।
"त्रिपुरा में हमने पहले ही 80 एकीकृत कृषि क्लस्टर के लिए 32 करोड़ रुपये की निवेश के साथ गतिविधियां शुरू कर दी हैं। इनका उद्घाटन 2 अगस्त, 2025 को संपन्नता अभियान सम्मान समारोह में किया गया था। इन क्लस्टरों का उद्देश्य आजीविका के प्रयासों को विविधता प्रदान करना और सशक्त बनाना है ताकि ग्रामीण परिवार समेकन और तालमेल के माध्यम से अपनी आय बढ़ा सकें," साहा ने कहा।
उन्होंने बताया कि आज त्रिपुरा में लगभग 4.85 लाख महिलाएं 54,113 स्वरोजगार समूहों, 2,470 ग्राम संगठनों और 173 क्लस्टर-स्तरीय महासंघों की सदस्य हैं।