चुनाव आयोग की जांच और धार्मिक अपीलों पर रोक की मांग, SC में याचिका

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 24-10-2026
PIL in SC seeks expert panel to examine election commission’s functioning, curb religious appeals in campaigns
PIL in SC seeks expert panel to examine election commission’s functioning, curb religious appeals in campaigns

 

दिल्ली 
 
सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इसमें भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश या सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग की गई है। यह समिति भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज में कथित संस्थागत कमियों की जांच करेगी। अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दायर इस याचिका में यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि चुनाव आयोग उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को चुनाव प्रचार के दौरान धार्मिक पहचान का इस्तेमाल करने, धार्मिक प्रतीकों को दिखाने, या नफरत भरे भाषणों (हेट स्पीच) के जरिए सांप्रदायिक और गुटीय अपील करने से रोके।
 
याचिका में 23 सितंबर की एक अखबार की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। इसमें बताया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने दस महीने की अवधि में कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। ये आपत्तियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान कुमार द्वारा कथित तौर पर एकतरफा लिए गए फैसलों के खिलाफ थीं। इन आपत्तियों में बिना अनुमति के वैधानिक 'फॉर्म 6' में बदलाव, चुनावी डेटाबेस का केंद्रीकरण, बिना मंजूरी के पश्चिम बंगाल में अपीलें दायर करना और काम के बंटवारे से जुड़े आदेश शामिल थे।
 
याचिका के अनुसार, ECI ने इन असहमति वाले नोटों को स्वीकार तो किया, लेकिन इन्हें केवल 'सामान्य सुझाव' बता दिया। साथ ही, यह नहीं बताया गया कि 'फॉर्म 6' में बदलाव करने की अनुमति किसने दी थी। याचिका में पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) को लागू करने को लेकर भी चिंता जताई गई है। ECI द्वारा दायर एक हलफनामे पर मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा गया है कि मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों की ओर से लगभग 38.20 लाख अपीलें दायर की गई थीं, जिनमें से केवल 1.02 लाख का ही निपटारा किया गया। बताया गया है कि चुनाव आयोग ने अपीलीय न्यायाधिकरणों (अपीलेट ट्रिब्यूनल) की संख्या 19 से बढ़ाकर 42 करने का प्रस्ताव दिया था।
 
इसके अलावा, याचिका में एक मीडिया रिपोर्ट का जिक्र किया गया है, जिसके अनुसार महाराष्ट्र की मतदाता सूची के ड्राफ्ट में जन्म-वर्ष की तकनीकी खराबी (ग्लिच) के कारण 2,70,313 मतदाताओं की उम्र 101 से 150 साल के बीच दर्ज हो गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इन घटनाओं को देखते हुए एक संस्थागत समीक्षा की जरूरत है। उन्होंने संवैधानिक कानून, चुनाव प्रशासन, सांख्यिकी, प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा के विशेषज्ञों को शामिल करके एक समिति गठित करने की मांग की है। प्रस्तावित पैनल ECI (चुनाव आयोग) के कामकाज में मौजूद कमियों की जांच करेगा। इस याचिका का उद्देश्य संस्थागत जवाबदेही को मजबूत करना और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को सुरक्षित रखना है।
 
याचिका के भविष्योन्मुखी और निष्पक्ष स्वरूप पर जोर देते हुए, तिवारी ने स्पष्ट किया है कि इसका मकसद न तो किसी राजनीतिक दल या सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति पर गलत काम का आरोप लगाना है और न ही किसी चुनाव के नतीजों को चुनौती देना है।