प्रेम नज़ीर: 400 सुपर हिट फिल्में देने वाले सुपर स्टार को भूल गए लोग

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 24-10-2026
Prem Nazir: The superstar whose records remain unbroken to this day.
Prem Nazir: The superstar whose records remain unbroken to this day.

 

गुलाम कादिर

जब भी देश के सबसे बड़े फिल्म स्टार्स का जिक्र होता है, लोगों की जुबान पर अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, रजनीकांत और कमल हासन जैसे नाम आते हैं। यह आम बात है,क्योंकि बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय सिनेमा के इन दिग्गजों ने बॉक्स ऑफिस पर कई रिकॉर्ड बनाए हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बॉक्स ऑफिस की सफलता और फिल्मों की संख्या के मामले में इन सभी सुपरस्टार्स को पीछे छोड़ने वाला एक ऐसा महानायक भी है, जिसे आज की पीढ़ी ज्यादातर भूल चुकी है। यह कहानी है मलयालम सिनेमा के सदाबहार हीरो प्रेम नज़ीर की, जिनके नाम ऐसे रिकॉर्ड दर्ज हैं जिन्हें तोड़ना आज के समय में लगभग नामुमकिन है।

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फिल्म जगत में सफलता का पैमाना हमेशा से बहस का मुद्दा रहा है। अगर बात सिर्फ फिल्मों की संख्या और हिट्स की हो, तो कोई भी अभिनेता उनके आसपास भी नहीं टिकता है। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रेम नज़ीर ने अपने लंबे करियर में 400 से अधिक सुपरहिट फिल्में दीं।

इनमें से कम से कम 50 फिल्में ऐसी थीं जिन्हें ब्लॉकबस्टर का दर्जा मिला। अगर हम आज के समय के दिग्गजों की कुल हिट फिल्मों को भी आपस में मिला लें, तब भी वे प्रेम नज़ीर के इस आंकड़े के सामने काफी पीछे रह जाते हैं।

प्रेम नज़ीर का जन्म 1929 में हुआ था और उनका असली नाम अब्दुल खादर था। उन्होंने अपने अभिनय सफर की शुरुआत थिएटर से की थी। साल 1951 में उन्होंने मशहूर नाटक द मर्चेंट ऑफ़ वेनिस में शाइलॉक की भूमिका निभाई थी।

इसके अगले ही साल उन्होंने फिल्मों की दुनिया में कदम रखा। शुरुआत में उन्होंने अपने असली नाम का ही इस्तेमाल किया था। उनकी शुरुआती फिल्म विसप्पिंटे विली उनके करियर का बड़ा मोड़ साबित हुई। इसी फिल्म के बाद उन्हें प्रेम नज़ीर नाम मिला और बतौर मुख्य अभिनेता उनका सफर शुरू हुआ।

1950 के दशक के आखिर तक वे मलयालम फिल्म उद्योग के स्थापित सितारे बन चुके थे। उन्होंने सामाजिक मुद्दों और अन्याय के खिलाफ लड़ने वाले किरदार चुनना शुरू किए। नब्बे के दशक के इस दौर में उन्होंने कई अलग तरह की भूमिकाएं निभाईं।

साल 1967 में आई फिल्म इरुत्तिन्ते आत्मावु में उन्होंने एक मानसिक रूप से परेशान युवक का रोल निभाया था। उनके इस अभिनय ने आलोचकों का दिल जीत लिया था। इसके अलावा उन्होंने कई फिल्मों में भगवान राम, कृष्ण और अयप्पा जैसे पौराणिक किरदार भी निभाए, जिन्हें दर्शकों का बहुत प्यार मिला।

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मलयालम सिनेमा के इस सुनहरे दौर में प्रेम नज़ीर और अभिनेत्री शीला की जोड़ी पर्दे पर छा गई थी। दोनों ने साथ मिलकर लगभग 130 फिल्मों में काम किया। यह एक ऐसा वर्ल्ड रिकॉर्ड है जो आज भी सिनेमा के इतिहास में दर्ज है।

इन 130 फिल्मों में से करीब 50 फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुईं। उनकी ऑन स्क्रीन केमिस्ट्री को दर्शकों ने इतना पसंद किया कि आज भी भारतीय सिनेमा में इस जोड़ी मिसाल दी जाती है।

1970 का दशक प्रेम नज़ीर के जीवन का सबसे व्यस्त समय रहा। वे एक साथ कई फिल्मों की शूटिंग किया करते थे। उनकी काम करने की रफ्तार इतनी तेज थी कि कई बार कुछ ही हफ्तों में प्रोजेक्ट पूरे हो जाते थे।

साल 1979 उनके करियर का सबसे अनोखा साल रहा क्योंकि इस एक साल में उनकी कुल 39 फिल्में रिलीज हुईं। भारतीय सिनेमा के इतिहास में यह रिकॉर्ड आज भी अनोखा बना हुआ है। किसी भी मुख्य अभिनेता के लिए एक साल में इतने काम को पूरा करना और बॉक्स ऑफिस पर सफल रहना असाधारण बात है।

1980 के दशक की शुरुआत में सिनेमा का मिजाज बदलने लगा। नए और युवा कलाकारों ने एंट्री ली। जयन, सुकुमारन, शंकर और सोमन जैसे सितारे दर्शकों की पसंद बनने लगे। उस वक्त प्रेम नज़ीर की उम्र पचास साल से ज्यादा हो चुकी थी।

उन्होंने खुद को समय के अनुसार ढाला और मुख्य भूमिकाओं के साथ साथ मजबूत सहायक किरदार भी निभाने शुरू किए। साल 1982 में आई फिल्म पदयोट्टम और 1985 की वेल्लारिक्का पट्टनम में उनके काम को आज भी याद किया जाता है।

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उनका सपना मलयालम सिनेमा के आने वाले दौर के बड़े सितारों मोहनलाल और ममूटी को लेकर एक फिल्म निर्देशित करने का था। वे चाहते थे कि दोनों युवा कलाकार एक साथ पर्दे पर आएं। हालांकि उनका यह सपना अधूरा रह गया।

लंबी बीमारी के बाद 16 जनवरी 1989 को 59 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनकी आखिरी फिल्म प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी कडथनडन अंबाडी थी, जो उनके जाने के बाद 1990 में रिलीज हुई। इस फिल्म में वे मोहनलाल के साथ नजर आए थे।

आज के समय में जब हम बॉक्स ऑफिस के नए रिकॉर्ड और करोड़ों की कमाई की बातें करते हैं, तब प्रेम नज़ीर का यह सफर हमें याद दिलाता है कि निरंतरता और मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता है। उन्होंने करीब एक हजार फिल्मों में काम किया जिनमें सात सौ से अधिक फिल्मों में वे मुख्य नायक थे।

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तीन दशकों से ज्यादा समय तक मलयालम सिनेमा की धड़कन रहे प्रेम नज़ीर को उनके चाहने वाले प्यार से नित्यहरिता नायकन यानी सदाबहार हीरो कहते थे। उनकी विरासत सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि यह उस समर्पण का प्रमाण है जो उन्होंने भारतीय सिनेमा को दिया। आधुनिक दौर के दर्शकों और फिल्म प्रेमियों के लिए उनका जीवन इस बात की मिसाल है कि सिनेमा में लोकप्रियता का असली अर्थ जनता के दिलों पर राज करना होता है।