प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों को हटाने संबंधी विधेयक के लिए गठित जेपीसी पर विश्वास नहीं: ओब्रायन

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 29-08-2025
No confidence in JPC constituted for bill to remove Prime Minister, Chief Ministers: O'Brien
No confidence in JPC constituted for bill to remove Prime Minister, Chief Ministers: O'Brien

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओब्रायन ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को 30 दिन तक जेल में रहने पर पद से हटाने से संबंधित विधेयकों पर विचार के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) पर विश्वास नहीं किया जा सकता.

उन्होंने यह बात ऐसे समय कही है जब कई विपक्षी दलों ने घोषणा की है कि वे समिति में शामिल नहीं होंगे.
 
ओब्रायन ने जेपीसी के समक्ष विपक्ष की आपत्तियों के उदाहरण सूचीबद्ध किए, जिनमें आमतौर पर सत्ता पक्ष के सदस्यों का दबदबा होता है.
 
उन्होंने “जेपीसी पर विश्वास न कर पाने के छह कारण” शीर्षक से लिखे एक ब्लॉग में पुराने मामलों का जिक्र किया, जिनमें विपक्ष ने जेपीसी के समक्ष आपत्तियां जताई थीं.
 
बोफोर्स अनुबंध घोटाले की जांच के लिए 1987 में गठित जेपीसी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि छह प्रमुख विपक्षी दलों ने समिति का बहिष्कार किया था, क्योंकि इसके अधिकतर सदस्य कांग्रेस से थे.
 
उन्होंने कहा, ‘‘दलों में से दो अब भी भाजपा के सहयोगी हैं। तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) और असम गण परिषद (अगप)। 1988 में प्रस्तुत समिति की रिपोर्ट को विपक्ष (गैर-कांग्रेसी) ने पक्षपातपूर्ण होने के कारण खारिज कर दिया था.
 
तृणमूल नेता ने 2013 में ऑगस्टा वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर मामले की जांच के लिए गठित जेपीसी का भी जिक्र किया.
 
उन्होंने लिखा कि जब राज्यसभा में इसके गठन का प्रस्ताव पारित हुआ था, तब तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने कहा था कि यह सरकार की ‘‘व्यर्थ की कवायद’’ और ‘‘ध्यान भटकाने की रणनीति’’ होगी.
 
ओब्रायन ने कहा कि 2014 से अब तक संसद ने 11 संयुक्त संसदीय समितियों का गठन किया है.
 
उन्होंने कहा कि सात मामलों में जेपीसी के गठन का प्रस्ताव सत्र के आखिरी दिन पारित किया गया.