NIA conducts searches at 10 locations in J-K in LeT-linked cross-border terror conspiracy case
नई दिल्ली
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर में 10 जगहों पर तलाशी ली। यह कार्रवाई सीमा-पार आतंकी साज़िश के सिलसिले में की गई, जिसमें प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के पाकिस्तान-स्थित हैंडलर और उनके स्थानीय 'ओवर ग्राउंड वर्कर्स' (OGW) के कथित नेटवर्क की भूमिका शामिल है।
यह तलाशी कुपवाड़ा, कुलगाम, बांदीपोरा, बारामूला और सोपोर में की गई, ताकि साज़िश से जुड़े और सबूत मिल सकें और घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों को लॉजिस्टिकल और अन्य मदद देने वाले लोगों की भूमिका का पता लगाया जा सके।
यह मामला शुरू में ज़कूरा पुलिस स्टेशन, श्रीनगर में दर्ज किया गया था, जिसे बाद में NIA ने UA(P) एक्ट, 1967 की धारा 23, आर्म्स एक्ट, 1959 की धारा 7 और 25, और एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट, 1908 की धारा 4 के तहत फिर से दर्ज किया।
जांच की शुरुआत 31 मार्च, 2026 की देर रात एक नाका पॉइंट पर LeT से जुड़े एक OGW की गिरफ्तारी के बाद हुई। उसके पास से एक हैंड ग्रेनेड और ज़िंदा कारतूस बरामद किए गए थे।
इसके बाद हुई जांच से साज़िश में शामिल पाकिस्तानी नागरिकों की गिरफ्तारी हुई और स्थानीय सपोर्ट नेटवर्क के सदस्यों की पहचान और उनकी संदिग्ध भूमिकाओं का पता चला। अब तक की जांच से पाकिस्तान में मौजूद LeT के हैंडलर्स और उनके स्थानीय साथियों के बीच संबंध सामने आए हैं। इन साथियों का इस्तेमाल घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों के साथ बातचीत, उनकी आवाजाही, उन्हें छिपाने, पनाह देने, रेकी करने और दूसरी लॉजिस्टिकल मदद के लिए किया जा रहा था।
NIA पूरे नेटवर्क का पता लगाने और उनकी गतिविधियों के दायरे को समझने के लिए पैसों के लेन-देन, बातचीत के तरीकों, आरोपियों की आवाजाही और हथियारों व विस्फोटकों के स्रोत और सप्लाई चेन की भी जांच कर रही है।
शनिवार को की गई छापेमारी, NIA की उस जांच का हिस्सा है जो एक बड़ी साजिश और सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले सपोर्ट सिस्टम के बारे में चल रही है। छापेमारी के दौरान मामले से जुड़े और भी अहम सबूत/सामान ज़ब्त किए गए। इनकी जांच की जा रही है और जांच के दौरान मिले दूसरे सबूतों से इनका मिलान किया जा रहा है।
NIA साजिश में शामिल सभी लोगों की पहचान करने और उनकी भूमिका का पता लगाने के लिए जांच जारी रखे हुए है। जांच के नतीजों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें गिरफ्तारियां और बरामदगी शामिल हो सकती है।