BRICS में मोदी और पेजेशकियन की मुलाकात, बदलेगा पश्चिम एशिया का समीकरण

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 12-09-2026
Modi and Pezeshkian meet at BRICS; West Asia's equations set to change.
Modi and Pezeshkian meet at BRICS; West Asia's equations set to change.

 

आवाज द वाॅयस /नई दिल्ली

राजधानी दिल्ली में आयोजित BRICS Summit 2026 के दौरान भारत और ईरान के रिश्तों को लेकर एक अहम मुलाकात हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है और क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा तथा समुद्री आवाजाही को लेकर कई देशों की चिंता बढ़ी हुई है।

बैठक में भारत ईरान संबंधों को आगे बढ़ाने, पश्चिम एशिया की स्थिति और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के बाद सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि बिश्केक से दिल्ली तक दोनों नेताओं के बीच उपयोगी बातचीत जारी है।

मोदी ने राष्ट्रपति पेजेशकियन की पहली भारत यात्रा को विशेष अवसर बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की दोस्ती को लंबे समय की ऐसी रणनीति के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है, जिससे दोनों देशों को लाभ मिले। प्रधानमंत्री ने क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा की और कहा कि भारत स्थायी शांति के प्रयासों के लिए प्रतिबद्ध है।

यह मोदी और पेजेशकियन की करीब दो सप्ताह के भीतर दूसरी मुलाकात थी। इससे पहले दोनों नेता 31 अगस्त को बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO Summit के दौरान मिले थे। उस बैठक में भी पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और शांति की जरूरत पर चर्चा हुई थी। अब दिल्ली में BRICS Summit के दौरान हुई मुलाकात ने भारत ईरान संवाद को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में ला दिया है।

पश्चिम एशिया में शांति पर भारत का जोर

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति ने द्विपक्षीय संबंधों के अलग अलग पहलुओं पर विचार किया। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में हालिया घटनाक्रम पर भी चर्चा की।

भारत ने एक बार फिर अपना पारंपरिक रुख दोहराया कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए। भारत ने स्थायी शांति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए लगातार प्रयास जारी रखने की बात कही।

बैठक में समुद्री आवाजाही का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्र नौवहन और व्यापारिक गतिविधियों की सुरक्षा पर जोर दिया। उन्होंने समुद्र में काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा और उनके कल्याण को भी महत्वपूर्ण बताया। पश्चिम एशिया में तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, समुद्री परिवहन और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत के लिए सुरक्षित समुद्री मार्गों का महत्व काफी बढ़ जाता है।

भारत और ईरान के बीच संबंध केवल राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्ते भी रहे हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत और ईरान के संबंधों को सभ्यतागत रिश्तों से जोड़ा।

उन्होंने दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक और जनसंपर्क संबंधों का उल्लेख किया। BRICS के सदस्य देशों के रूप में भारत और ईरान साझा आर्थिक विकास और समृद्धि में योगदान देने की दिशा में भी काम कर रहे हैं।

ईरान ने BRICS में स्थानीय मुद्रा का मुद्दा उठाया

BRICS Business Forum के Leaders Session में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर भी महत्वपूर्ण बात रखी। उन्होंने BRICS देशों के बीच व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने की जरूरत बताई।

पेजेशकियन के अनुसार, इससे सदस्य देशों की आर्थिक मजबूती बढ़ सकती है और सीमित संख्या में अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं पर निर्भरता कम की जा सकती है। उन्होंने मुद्रा जोखिम को संभालने और दोनों तरफ से भुगतान की व्यवस्था को आसान बनाने के लिए नए तंत्र विकसित करने की जरूरत भी बताई।

पेजेशकियन ने BRICS New Development Bank यानी NDB की भूमिका बढ़ाने की भी वकालत की। उन्होंने कहा कि बैंक को BRICS देशों में बुनियादी ढांचे और ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ज्यादा वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में काम करना चाहिए। इसके लिए स्थानीय मुद्रा में वित्तपोषण, विशेष क्रेडिट लाइन और गारंटी व्यवस्था जैसे विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है। उनका कहना था कि इससे निजी निवेश को भी आकर्षित करने में मदद मिल सकती है।

ईरानी राष्ट्रपति ने BRICS देशों के बीच व्यापार और परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया। डिजिटल कस्टम प्रक्रिया, कम नियामकीय बाधाएं और बेहतर कनेक्टिविटी को उन्होंने आर्थिक सहयोग के लिए जरूरी बताया। ईरान की भौगोलिक स्थिति, ऊर्जा संसाधन और परिवहन संपर्क उसे BRICS की कनेक्टिविटी और सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण भूमिका दे सकते हैं।

भारत ईरान संबंधों में चाबहार की भूमिका

भारत के लिए ईरान का महत्व रणनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर है। खासकर चाबहार पोर्ट भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजनाओं में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। चाबहार के जरिए भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच बनाने का रास्ता मिलता है। यही कारण है कि भारत ईरान संबंधों में चाबहार बंदरगाह का मुद्दा लंबे समय से अहम बना हुआ है।

पश्चिम एशिया में मौजूदा तनाव के बीच भारत के सामने संतुलित कूटनीति बनाए रखने की चुनौती भी है। भारत के ईरान के साथ पुराने संबंध हैं। दूसरी ओर भारत के इजरायल और अमेरिका के साथ भी महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं। ऐसे माहौल में नई दिल्ली लगातार बातचीत, कूटनीति और क्षेत्रीय शांति पर जोर देती रही है। मोदी और पेजेशकियन की ताजा बैठक को इसी व्यापक कूटनीतिक संदर्भ में देखा जा सकता है।

ईरानी राष्ट्रपति का भारतीय प्रतिनिधियों से संवाद

दिल्ली में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने धार्मिक नेताओं, बुद्धिजीवियों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों के साथ भी संवाद किया। कार्यक्रम का आयोजन भारत में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फथाली की मेजबानी में हुआ। इस दौरान पेजेशकियन का स्वागत भी किया गया। कार्यक्रम में देश के अलग अलग हिस्सों से आए धार्मिक और सामाजिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

ईरानी राजदूत मोहम्मद फथाली ने क्षेत्र में ईरान के सामने आई चुनौतियों और वहां की मौजूदा स्थिति पर बात की। उन्होंने कहा कि ईरान की जनता ने संकट के दौरान प्रतिरोध का रास्ता चुना है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका देश दबाव के सामने डरने वाला नहीं है। ईरानी पक्ष ने राष्ट्रीय एकता, सावधानी और जनता की आजीविका पर ध्यान देने की बात भी कही।

पेजेशकियन ने BRICS मंच पर दुनिया की मौजूदा आर्थिक चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता, सप्लाई चेन में रुकावट और आर्थिक साधनों के जरिए राजनीतिक दबाव बढ़ने की बात कही। उनके अनुसार BRICS की ताकत केवल सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं के आकार में नहीं है। असली क्षमता तब सामने आएगी जब इन देशों के बीच व्यापार, निवेश और संयुक्त वित्तीय सहयोग के मजबूत नेटवर्क तैयार होंगे।

पेजेशकियन ने पहले भी अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की जरूरत का मुद्दा उठाया था। उनका जोर BRICS के भीतर आर्थिक सहयोग बढ़ाने और स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल पर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने व्यापार, परिवहन और डिजिटल कस्टम व्यवस्था को बेहतर बनाने की बात कही।

कुल मिलाकर, BRICS Summit 2026 में नरेंद्र मोदी और मसूद पेजेशकियन की मुलाकात कई स्तरों पर महत्वपूर्ण रही। बातचीत में भारत ईरान संबंध, पश्चिम एशिया संकट, क्षेत्रीय शांति, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और BRICS सहयोग जैसे मुद्दे सामने आए।

भारत ने जहां संवाद और कूटनीति के जरिए शांति का अपना रुख दोहराया, वहीं ईरान ने BRICS के भीतर आर्थिक सहयोग और राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को मजबूत करने की वकालत की। आने वाले समय में चाबहार पोर्ट, व्यापारिक संपर्क, ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता भारत ईरान संबंधों के प्रमुख मुद्दे बने रह सकते हैं।