एनजीटी ने आगरा में सूर सरोवर पक्षी अभयारण्य का 798.1505 हेक्टेयर तक विस्तार दर्ज किया

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 28-09-2026
NGT records expansion of Soor Sarovar Bird Sanctuary in Agra to 798.1505 hectares
NGT records expansion of Soor Sarovar Bird Sanctuary in Agra to 798.1505 hectares

 

नई दिल्ली 
 
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने आगरा में सूर सरोवर पक्षी अभयारण्य (Soor Sarovar Bird Sanctuary) के विस्तार की प्रक्रिया पूरी करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के कदमों का संज्ञान लिया है। यह विस्तार सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की सिफारिशों के अनुपालन में जारी कई नोटिफिकेशन्स के बाद किया गया है, जिससे अभयारण्य का कुल क्षेत्रफल 798.1505 हेक्टेयर हो गया है। NGT के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. अफरोज अहमद की बेंच ने 24 सितंबर को 'डॉ. शरद गुप्ता बनाम भारत संघ और अन्य' (ओरिजिनल एप्लीकेशन नंबर 529/2023) मामले का निपटारा करते हुए यह आदेश पारित किया।
 
इस एप्लीकेशन में सुप्रीम कोर्ट के 23 सितंबर, 2022 के आदेश के अनुसार CEC की सिफारिशों को समयबद्ध तरीके से लागू करने की मांग की गई थी। यह मामला आगरा जिले में स्थित सूर सरोवर पक्षी अभयारण्य (SSBS) के विस्तार और 25 नवंबर, 2021 की रिपोर्ट में CEC द्वारा की गई सिफारिशों को लागू करने से संबंधित था। CEC ने सिफारिश की थी कि वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1972 की धारा 26A के तहत 403.09 हेक्टेयर क्षेत्र को सूर सरोवर पक्षी अभयारण्य के हिस्से के रूप में अधिसूचित किया जाए। इसने एक्ट की धारा 18 से 25 के तहत कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए, 380.558 हेक्टेयर के सूरदास रिजर्व फॉरेस्ट ब्लॉक और बफर जोन का हिस्सा बनने वाली सरकारी जमीन को शामिल करके अभयारण्य के विस्तार पर विचार करने की भी सिफारिश की थी।
ट्रिब्यूनल ने गौर किया कि जब एप्लीकेशन लंबित थी, तब उत्तर प्रदेश सरकार ने CEC की सिफारिशों को लागू करने के लिए कदम उठाए और कुल 798.1505 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हुए तीन नोटिफिकेशन्स जारी किए।
 
12 जून, 2024 को जारी पहले नोटिफिकेशन में आगरा में 403.09 हेक्टेयर क्षेत्र को सूर सरोवर पक्षी अभयारण्य के रूप में अधिसूचित किया गया। इसके बाद, 27 दिसंबर 2024 की एक अधिसूचना के ज़रिए सूरदास फ़ॉरेस्ट ब्लॉक के 380.558 हेक्टेयर रिज़र्व फ़ॉरेस्ट को अभयारण्य में शामिल किया गया। बाद में, 31 अगस्त 2026 को इस अधिसूचना में संशोधन किया गया। विस्तार के अंतिम हिस्से में 14.5025 हेक्टेयर सरकारी ज़मीन शामिल थी। राज्य सरकार ने 10 सितंबर 2026 को एक अधिसूचना जारी की, जिसमें वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26A के तहत अतिरिक्त ज़मीन को शामिल करने के लिए पहले की अभयारण्य अधिसूचना में संशोधन किया गया।
 
10 सितंबर की अधिसूचना में खास तौर पर यह दर्ज किया गया कि 403.09 हेक्टेयर ज़मीन को 2024 में अधिसूचित किया गया था और बाद में सूरदास रिज़र्व फ़ॉरेस्ट की 380.558 हेक्टेयर ज़मीन को इसमें शामिल किया गया था। इसके बाद, बाकी बची 14.5025 हेक्टेयर सरकारी ज़मीन को शामिल करने की व्यवस्था की गई, जिसकी जानकारी सीमाओं और सर्वे के विवरण के साथ एक अलग अनुसूची में दी गई थी।
 
ट्रिब्यूनल ने 22 मई 2025 के अपने पिछले आदेश पर भी ध्यान दिया, जिसके तहत उत्तर प्रदेश सरकार को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की धारा 26A(1)(a) के तहत अभयारण्य में 14.5025 हेक्टेयर सरकारी ज़मीन को शामिल करने और अधिसूचित करने का निर्देश दिया गया था।
 
आदेश में दर्ज है कि तीनों हिस्से - 403.09 हेक्टेयर, 380.558 हेक्टेयर और 14.5025 हेक्टेयर - मिलकर कुल 798.1505 हेक्टेयर ज़मीन बनाते हैं, जो अब सूर सरोवर पक्षी अभयारण्य का कुल क्षेत्रफल है। NGT ने आगे कहा कि 10 सितंबर 2026 की अधिसूचना जारी होने के साथ ही, आवेदक द्वारा मांगी गई राहत पूरी हो गई। नतीजतन, ट्रिब्यूनल ने मूल आवेदन का निपटारा कर दिया। CEC की मूल सिफ़ारिश में अभयारण्य के विस्तार के हिस्से के तौर पर विचार करने के लिए 15.514 हेक्टेयर सरकारी ज़मीन का ज़िक्र किया गया था; NGT के आदेश में जिन बाद के नोटिफ़िकेशन का ज़िक्र किया गया था, उनमें आखिरकार 14.5025 हेक्टेयर सरकारी ज़मीन भी शामिल हो गई, जिससे नोटिफ़ाइड सैंक्चुअरी का कुल एरिया 798.1505 हेक्टेयर हो गया।
 
अर्जी देने वाले की तरफ़ से वकील अंशुल गुप्ता और आदित्य तिंगुरिया पेश हुए। रेस्पॉन्डेंट 4 और 5 की तरफ़ से भंवर पाल सिंह जादौन, शिवांश शर्मा और दिशा तिवारी पेश हुए, जबकि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की तरफ़ से वकील निधि जसवाल वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए पेश हुईं।