MP: भोपाल में आउटसोर्स और अस्थायी क्लास-IV कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 28-09-2026
MP: Outsourced, temporary Class IV employees stage protest in Bhopal, demand minimum wage and regularisation
MP: Outsourced, temporary Class IV employees stage protest in Bhopal, demand minimum wage and regularisation

 

भोपाल (मध्य प्रदेश)

मध्य प्रदेश के अलग-अलग सरकारी विभागों में काम करने वाले क्लास IV के आउटसोर्स और अस्थायी कर्मचारियों ने सोमवार को भोपाल में बीजेपी ऑफिस के पास विरोध प्रदर्शन किया। वे कम से कम वेतन और अपनी नौकरी पक्की करने की मांग कर रहे थे। स्कूल शिक्षा और आदिवासी मामलों के विभागों के तहत स्कूलों, हॉस्टलों और आश्रमों में काम करने वाले क्लास IV के पार्ट-टाइम वर्कर, रसोइए, चपरासी, सफाई कर्मचारी, चौकीदार और पंप ऑपरेटर समेत कई कर्मचारी राज्य की राजधानी में 28 और 29 सितंबर को दो दिन का विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
 
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का आरोप है कि दो दशक से ज़्यादा समय से काम करने के बावजूद, उनमें से कई को हर महीने 2,000 से 5,000 रुपये के बीच वेतन मिल रहा है। अस्थायी आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा के राज्य अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार ने पिछले 20-25 सालों से सरकारी दफ्तरों में क्लास IV के कर्मचारियों की भर्ती नहीं की है और इसके बजाय अस्थायी कर्मचारियों से काम करवा रही है।
 
शर्मा ने कहा, "इनमें स्कूलों और हॉस्टलों में काम करने वाले पार्ट-टाइम कर्मचारी, रसोइए, चपरासी, सफाई कर्मचारी, पंचायत चौकीदार और पंप ऑपरेटर शामिल हैं। ये वे लोग हैं जो सरकारी दफ्तरों में सबसे ज़्यादा काम करते हैं। वे सुबह करीब 10 बजे आते हैं और रात करीब 8 बजे जाते हैं, लेकिन कुछ को 2,500 रुपये, कुछ को 3,000 रुपये और कुछ को 5,000 रुपये मिलते हैं। ये कर्मचारी सरकारी दफ्तरों में सफाई बनाए रखने और दफ्तर आने वाले लोगों की मदद करने समेत कई काम करते हैं, लेकिन उन्हें बहुत कम वेतन मिलता रहता है।"
 
उन्होंने यह भी दावा किया कि पंचायतों में काम करने वाले कर्मचारियों को कभी-कभी सालों तक अपना 2,500 रुपये का वेतन भी नहीं मिलता, जबकि स्कूलों और हॉस्टलों में पार्ट-टाइम कर्मचारियों, रसोइयों, चपरासियों और सफाई कर्मचारियों को कथित तौर पर चार से पांच महीने तक वेतन नहीं मिलता है।
 
शर्मा ने कहा, "यह बहुत बड़ी विडंबना है कि सरकार ने क्लास IV की सभी नौकरियां खत्म कर दी हैं और मुफ्त में काम करवा रही है।" उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को भारी आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि कर्मचारी भूख हड़ताल करने के लिए भोपाल में इकट्ठा हुए थे और वे तब तक अपना विरोध जारी रखेंगे जब तक सरकार 12,500 रुपये की न्यूनतम मजदूरी लागू करने की घोषणा नहीं कर देती, जो उनके अनुसार सरकार ने ही तय की थी।
 
शर्मा ने कहा, "हम यहां भूख हड़ताल पर बैठे हैं। हम तब तक यहीं रहेंगे जब तक सरकार यह घोषणा नहीं कर देती कि वह अपने न्यूनतम मजदूरी कानून को लागू करेगी और इन कर्मचारियों को 12,500 रुपये की न्यूनतम मजदूरी का भुगतान करेगी।"