RBI वित्त वर्ष 2027 में रेपो रेट 50bps बढ़ा सकता है

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 28-09-2026
HSBC expects RBI to raise repo rate by 50 bps in FY27 amid strong growth, inflation pressures
HSBC expects RBI to raise repo rate by 50 bps in FY27 amid strong growth, inflation pressures

 

नई दिल्ली 
 
HSBC ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ RBI के 7 प्रतिशत के अनुमान से काफी ज़्यादा रही, जिससे धीरे-धीरे ब्याज दरें बढ़ाने का दौर शुरू होने की उम्मीद है। रिपोर्ट का अनुमान है कि RBI वित्त वर्ष 27 में दो बार रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करेगा, जिससे यह 5.75 प्रतिशत हो जाएगा, क्योंकि आर्थिक विकास मज़बूत बना हुआ है और महंगाई का दबाव भी बना हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है, "वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में GDP ग्रोथ RBI के 7 प्रतिशत के अनुमान से काफी ज़्यादा रही है। इसके अलावा, RBI को उम्मीद है कि अगले तीन क्वार्टर में महंगाई औसतन 5 प्रतिशत से ज़्यादा रहेगी। हमारा मानना ​​है कि इन हालात में धीरे-धीरे ब्याज दरें बढ़ाने की गुंजाइश बनती है।"
 
इसमें यह भी उम्मीद जताई गई है कि RBI, FCNR(B) डिपॉज़िट से बनी अतिरिक्त लिक्विडिटी (नकदी) को ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) बिक्री जैसे स्थायी उपायों के ज़रिए सोख लेगा। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही में महंगाई RBI के 4 प्रतिशत के लक्ष्य के करीब रहने की उम्मीद है, जबकि दूसरी छमाही में इसके बढ़ने का अनुमान है। अगले नौ महीनों में हेडलाइन महंगाई औसतन 5 प्रतिशत से ऊपर रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है, "जून में थोड़ी गिरावट के बाद ब्रेंट ऑयल की कीमतों में फिर से तेज़ी आई है। दिसंबर तिमाही में अल नीनो की स्थिति मज़बूत होने की संभावना है, जिससे खाने-पीने की चीज़ों की महंगाई बढ़ सकती है।"
 
इसमें आगे कहा गया है कि कंपनियाँ इनपुट लागत में बढ़ोतरी का बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं, जिससे वित्त वर्ष 27 के अंत तक कोर महंगाई 5 प्रतिशत के करीब पहुँच सकती है। जून में खत्म हुई तिमाही के लिए भारत की GDP ग्रोथ 7.8 प्रतिशत रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि मज़बूत कंज्यूमर डिमांड और मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में तेज़ी से आर्थिक गति को बनाए रखने में मदद मिली।
 
सरकारी उपायों ने भी विकास को बढ़ावा दिया, जिसमें GST और एक्साइज़ ड्यूटी में कटौती, ज़्यादा सब्सिडी और पब्लिक कैपिटल खर्च में साल-दर-साल 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी शामिल है। हालांकि, रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि आने वाली तिमाहियों में आर्थिक विकास की रफ़्तार थोड़ी धीमी हो सकती है। इसकी वजहें हैं - ऊंचा बेस, सरकारी कैपिटल खर्च में कुछ कमी, बुआई में सुस्ती, कम बारिश और GST दरों में कटौती का असर कम होना। रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की विकास दर 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। इसमें कहा गया है कि आर्थिक गतिविधियों में लगातार मजबूती के कारण विकास दर में अचानक बड़ी गिरावट के बजाय धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है।
 
इस बीच, वित्त वर्ष 2027 में भारत का चालू खाता घाटा (current account deficit) बढ़कर GDP का 1.3 प्रतिशत होने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2026 में 0.6 प्रतिशत था। इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह तेल की ऊंची कीमतें और इलेक्ट्रॉनिक्स व अन्य मुख्य सामानों का आयात हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा (fiscal deficit) बजट अनुमान से GDP का 0.5 प्रतिशत अधिक हो सकता है, क्योंकि ऊर्जा की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से निपटने के उपायों के कारण खर्च बढ़ रहा है।