काठमांडू
नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों में अचानक आई बाढ़ से कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। कम से कम 162 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं।
नेपाल पुलिस मुख्यालय के केंद्रीय प्रवक्ता एवं डीआईजी अभि नारायण कपाले ने बताया कि रासुवा से लेकर नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, चितवन, तनहूं और पूर्वी नवलपरासी तक प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस ने बचाव और खोज अभियान तेज कर दिया है।
पुलिस के अनुसार, रासुवा में तैनात 64 पुलिसकर्मियों में से 32 से संपर्क हो चुका है, जबकि 28 पुलिसकर्मी अब भी लापता हैं। विभिन्न जिलों से अब तक 100 शव बरामद किए जाने की भी जानकारी दी गई है।
3,118 पुलिसकर्मी राहत अभियान में जुटे
नेपाल पुलिस ने बताया कि केंद्र और स्थानीय स्तर से बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को अभियान में लगाया गया है। रासुवा में एसएसपी चंद बहादुर बुढाथोकी के नेतृत्व में 22 पुलिसकर्मियों की टीम और एक मेडिकल टीम भेजी गई है। खोज एवं बचाव के लिए चार ड्रोन भी तैनात किए गए हैं। विभिन्न जिलों में कुल 3,118 स्थानीय पुलिसकर्मी राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं।
पुलिस ने लोगों से नदी किनारे, बाढ़ प्रभावित इलाकों और अन्य जोखिम वाले स्थानों पर नहीं जाने तथा सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
भूस्खलन और बाढ़ ने मचाई भारी तबाही
रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी क्षेत्र में ल्हेंदे नदी की सहायक धारा में हिमस्खलन के बाद आई बाढ़ ने तिमुरे बाजार को अपनी चपेट में ले लिया। बाढ़ का पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि देखते ही देखते पूरा बाजार तबाह हो गया।
बाढ़ से नौ जलविद्युत परियोजनाएं, 19 मोटरेबल पुल और करीब 40 किलोमीटर राजमार्ग क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है। नुवाकोट में भी सैकड़ों घरों के बह जाने की खबर है।
142 भारतीय और एनआरआई भी लापता
नेपाल पर्यटन बोर्ड के प्रारंभिक आंकड़ों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि भोटे कोशी नदी की इस आपदा के बाद लापता बताए गए 384 यात्रियों में 105 भारतीय नागरिक और 37 प्रवासी भारतीय (NRI) शामिल हैं। अधिकारियों ने कहा है कि आंकड़ों की जांच जारी है और लापता भारतीयों की संख्या बढ़ सकती है।
शुरुआती चेतावनी व्यवस्था पर उठे सवाल
आपदा के बाद नेपाल और चीन के बीच सीमा-पार शुरुआती चेतावनी प्रणाली को लेकर भी सवाल उठे हैं। अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ निगरानी के लिए लगाए गए कुछ स्टेशन बाढ़ की चपेट में आने से पहले चेतावनी भेजने में सक्षम नहीं रहे। हालांकि, नुवाकोट और निचले इलाकों के लिए बाद में चेतावनी जारी की गई, जिससे कई लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का समय मिला।
नेपाल और चीन ने 2019 में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को लेकर समझौता किया था, लेकिन मौजूदा घटना ने उसकी प्रभावशीलता और सीमा-पार समन्वय में मौजूद कमियों को उजागर किया है।
नेपाल के साथ खड़ा भारत
भारत ने नेपाल के राहत एवं बचाव प्रयासों में सहायता बढ़ा दी है। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने 10 टन मानवीय राहत सामग्री नेपाल को सौंपी है। राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने यह सहायता संस्कृति, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री खड़का राज पौडेल को सौंपी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात कर बाढ़ में हुई मौतों पर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत संकट की इस घड़ी में नेपाल के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है और हर संभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी बताया कि भारत की मानवीय सहायता, आपदा राहत एवं चिकित्सा सहायता काठमांडू पहुंच गई है और अतिरिक्त सहायता भेजी जा रही है।
नेपाल सरकार ने कहा है कि नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के साथ निजी क्षेत्र के हेलीकॉप्टर भी राहत एवं बचाव अभियान में लगाए गए हैं। तिमुरे, स्याफ्रुबेसी और नदी किनारे के अन्य इलाकों में फंसे लोगों को निकालने और लापता लोगों की तलाश का अभियान लगातार जारी है।