शिक्षक को सलाम: भारत के गुमनाम उस्ताद

Story by  अर्सला खान | Published by  [email protected] | Date 27-08-2026
Salute to the teacher: Our real 'gurus' who spread the word about education in remote areas
Salute to the teacher: Our real 'gurus' who spread the word about education in remote areas

 

मलिक असगर हाशमी

जब भी देश में शिक्षा और शिक्षकों के योगदान की बात होती है, तो हमारी जुबान पर पहला नाम सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन, देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद या मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का आता है। समकालीन दौर की बात करें, तो खान सर, विकास दिव्यकीर्ति, अवध ओझा और फिजिक्सवाला जैसे दिग्गज उस्तादों की चर्चा हर जुबान पर होती है। निश्चित तौर पर इन हस्तियों ने भारत में शिक्षा के परिदृश्य को बदलने और युवाओं को सही दिशा देने में बड़ी भूमिका निभाई है।
 
लेकिन, क्या देश के शिक्षा तंत्र की पूरी कहानी सिर्फ इन्हीं चर्चित और बड़े चेहरों तक सीमित है? सच तो यह है कि भारत के सुदूर गांवों, दूर-दराज के कस्बों और पहाड़ों की कंदराओं में ऐसे अनगिनत गुमनाम शिक्षक आज भी तैनात हैं, जो बिना किसी बड़ी सुख-सुविधा, बड़े बजट या मीडिया की चकाचौंध के देश का भविष्य गढ़े जा रहे हैं।
 
इनमें से कई शिक्षक ऐसे हैं जो बुनियादी ढांचे के अभाव और जर्जर भवनों के बीच अकेले ही एक साथ कई कक्षाओं के बच्चों को एक ही कमरे में बैठाकर तालीम देने को मजबूर हैं। इसके बावजूद वे हार नहीं मानते और उन्हीं जर्जर छतों के नीचे से ऐसे होनहार निकलते हैं, जो आगे चलकर देश-दुनिया में भारत का नाम रोशन करते हैं।
 
ऐसे ही गुमनाम मगर राष्ट्र-निर्माण में अमूल्य योगदान देने वाले शिक्षकों के जज्बे को नमन करने के लिए 'आवाज द वाॅयस' की अर्सला खान 27 अगस्त से एक विशेष संपादकीय श्रृंखला ‘शिक्षक को सलाम’ की शुरुआत कर रही हैं, जो राष्ट्रीय शिक्षक दिवस यानी 5 सितंबर तक चलेगी। इस विशेष श्रृंखला में हर दिन हम एक ऐसे शिक्षक की अनकही और प्रेरक कहानी आपके सामने लाएंगे, जिन्हें भले ही राष्ट्रीय स्तर पर बड़े पुरस्कार मिले हों, लेकिन उनकी ख्याति शायद बड़े नामों या सोशल मीडिया स्टार्स की तरह आम जनमानस तक नहीं पहुंच सकी।
 
 
अगर आप इन शिक्षकों द्वारा देश के पिछड़े और ग्रामीण इलाकों में शिक्षा के विस्तार के लिए किए गए कामों को जानेंगे, तो बेशक आपकी आंखें फक्र से चौड़ी हो जाएंगी।पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर स्थित नेपाली पारा हिंदी हाई स्कूल के डॉ. कलीमुल हक का मामला ही लीजिए।
 
उन्होंने एक जर्जर और शैक्षणिक रूप से पिछड़ चुके स्कूल को अपनी निष्ठा से एक मॉडल इंस्टीट्यूट में तब्दील कर दिया, जिसके लिए उन्हें 'शिक्षा रत्न 2019' और 'नेशनल अवॉर्ड 2020' से नवाजा गया। कर्नाटक के नाडा (बेल्थंगडी) में सरकारी हाई स्कूल के गणित शिक्षक याकूब एस. ने गणित जैसे कठिन विषय को बच्चों के लिए आसान बनाने के लिए 50 से अधिक हैंड्स-ऑन मॉडल, ऐप्स और गणित लैब तैयार कर एक नई मिसाल पेश की।
 
लद्दाख के करगिल (करित) के मिडिल स्कूल में पढ़ाने वाले मोहम्मद जाबिर की कहानी संघर्ष और प्रतिबद्धता की अनूठी मिसाल है। बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद उन्होंने दूरस्थ शिक्षा से अपनी पढ़ाई जारी रखी, एम.ए. अंग्रेजी और एम.फिल. की डिग्रियां लीं और आज लद्दाख के बच्चों के जीवन को संवारने के लिए 'नेशनल टीचर अवॉर्ड' से सम्मानित हो चुके हैं।
 
जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर (सौरा) की डॉ. उरफाना अमीन ने कला-एकीकृत शिक्षा 
(Art-integrated education), मूलभूत साक्षरता (FLN), समावेशी शिक्षा, रेडियो कक्षाओं और पाठ्यपुस्तक निर्माण के जरिए घाटी के बच्चों में शिक्षा की नई अलख जगाई है।
 
महाराष्ट्र के नांदेड (अर्धापुर) स्थित जिला परिषद हाई स्कूल के हेडमास्टर व साइंस टीचर डॉ. शेख मोहम्मद और वाक्युद्दीन शेख हमीदुद्दीन ने तो मिसाल ही कायम कर दी उन्होंने 2000 से अधिक छात्राओं के लिए अस्थाई स्कूल शाखा बनाई, 5 लाख से अधिक सैनिटरी नैपकिन बांटे, लड़कियों के ड्रॉप-आउट रोकने पर काम किया और समाज से 50 लाख रुपये से अधिक का सहयोग जुटाकर अवॉर्ड जीता।
 
लक्षद्वीप के एंद्रोथ द्वीप पर इब्राहिम एस. ने घर-घर जाकर बच्चों को वापस स्कूल लाया, ग्रीन लाइब्रेरी और हेल्थ इनिशिएटिव जैसी पहल से द्वीप के शिक्षा तंत्र की सूरत बदल दी। 
 
 
ये महज कुछ नाम हैं, लेकिन इनका काम यह बताने के लिए काफी है कि भारत की असली ताकत उसकी जड़ों में छिपे ये शिक्षक ही हैं। 'आवाज द वाॅयस' की यह कोशिश इन्हीं जमीनी नायकों के त्याग और जुनून को देश के सामने लाने की एक विनम्र पहल है। 

हम उम्मीद करते हैं कि 'शिक्षक को सलाम' की यह श्रृंखला आपको जरूर प्रेरित करेगी। इस पहल पर आपकी क्या राय है, हमें जरूर बताइएगा। आप हमें वेबसाइट के नीचे दिए गए ईमेल आईडी पर अपने विचार भेज सकते हैं। 

(लेखक आवाज द वाॅयस हिंदी के संपादक हैं।