राष्ट्रपति मुर्मू को हिरबाई ने दिया मां जैसा आशीर्वाद, भावुक हुआ पल

Story by  अर्सला खान | Published by  [email protected] | Date 27-08-2026
Hirbai Ibrahim Lobi blesses President Murmu: Video goes viral
Hirbai Ibrahim Lobi blesses President Murmu: Video goes viral

 

अर्सला खान/नई दिल्ली

राष्ट्रपति भवन का भव्य दरबार हॉल, देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्म पुरस्कार समारोह और मंच पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू... सब कुछ एक औपचारिक समारोह के मुताबिक चल रहा था। एक-एक कर सम्मानित हस्तियां मंच पर पहुंच रही थीं, राष्ट्रपति से सम्मान ग्रहण कर रही थीं और फिर अपनी जगह लौट रही थीं। लेकिन तभी मंच पर गुजरात की एक बुजुर्ग आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता पहुंचीं... उनका नाम था हिरबाई इब्राहिम लोबी। और फिर हुआ एक ऐसा पल, जिसने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया और बाद में सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा हुई।
 
जैसे ही हिरबाई राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास पहुंचीं, उन्होंने सिर्फ पद्मश्री सम्मान नहीं लिया। उन्होंने बेहद अपनापन दिखाते हुए राष्ट्रपति के दोनों हाथ थाम लिए। फिर एक बुजुर्ग मां की तरह उन्हें आशीर्वाद दिया और प्यार से गले लगा लिया। यह एक ऐसा दृश्य था, जिसमें पद, प्रोटोकॉल और औपचारिकता कुछ पलों के लिए पीछे छूट गए थे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी हिरबाई के इस स्नेह से भावुक हो गईं। उन्होंने भी उसी गर्मजोशी के साथ हिरबाई को गले लगाया। बस... यही वह पल था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
 
 
वीडियो देखने वाले लोगों ने इसे केवल एक पुरस्कार समारोह का दृश्य नहीं, बल्कि दो महिलाओं के बीच सम्मान, अपनापन और मानवीय रिश्ते का खूबसूरत पल बताया।
 
कौन हैं हिरबाई इब्राहिम लोबी?

हिरबाई इब्राहिम लोबी गुजरात के सिद्दी आदिवासी समुदाय से आने वाली एक जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के उन लोगों के लिए समर्पित कर दिया, जिनके पास शिक्षा और आर्थिक संसाधनों की कमी थी। खास तौर पर उन्होंने गरीब और जरूरतमंद महिलाओं तथा अनाथ बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए काम किया। उनका मानना था कि किसी भी महिला को मजबूत बनाने का सबसे बड़ा रास्ता है शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता। इसी सोच के साथ उन्होंने जरूरतमंद महिलाओं को आगे बढ़ने, अपने पैरों पर खड़े होने और सम्मान के साथ जीवन जीने के लिए प्रेरित किया।
 
 
महिलाओं और अनाथ बच्चों के लिए समर्पित जीवन

हिरबाई ने वर्षों तक समाज के कमजोर वर्गों के बीच काम किया। उन्होंने महिलाओं को शिक्षा से जोड़ने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास किए। उनका काम सिर्फ मदद पहुंचाने तक सीमित नहीं था। वह चाहती थीं कि महिलाएं किसी पर निर्भर न रहें। वे अपने फैसले खुद लें, अपने बच्चों को पढ़ाएं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करें। अनाथ और जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए भी उन्होंने महत्वपूर्ण काम किया। उनके लिए सामाजिक सेवा कोई अभियान या प्रोजेक्ट नहीं था, बल्कि जीवन का उद्देश्य था।
 
2023 में मिला पद्मश्री सम्मान

समाज के लिए उनके लंबे और समर्पित योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने साल 2023 में हिरबाई इब्राहिम लोबी को पद्मश्री से सम्मानित किया। लेकिन पुरस्कार समारोह में मिला वह सम्मान केवल एक पदक और प्रमाणपत्र तक सीमित नहीं रहा। हिरबाई ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने जिस सहजता और स्नेह का परिचय दिया, उसने उस पल को यादगार बना दिया। एक तरफ थीं देश की राष्ट्रपति और दूसरी तरफ थीं समाज की सेवा में अपना जीवन बिताने वाली एक बुजुर्ग महिला। लेकिन उस पल दोनों के बीच कोई औपचारिक दूरी नहीं थी। था तो बस एक मां जैसा स्नेह और एक बेटी जैसा सम्मान।
 
 
सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हुआ वीडियो?

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को देखकर लोगों ने हिरबाई की सादगी और आत्मीयता की खूब तारीफ की। कई लोगों ने लिखा कि सम्मान केवल मंच पर मिलने वाले पुरस्कार से नहीं होता, बल्कि इंसानियत और अपनापन ही सबसे बड़ा सम्मान है। कुछ लोगों ने राष्ट्रपति मुर्मू की सहज प्रतिक्रिया की भी सराहना की। लोगों का कहना था कि राष्ट्रपति ने भी उस पल को केवल एक औपचारिक समारोह की तरह नहीं देखा, बल्कि हिरबाई के स्नेह को उसी प्यार से स्वीकार किया। यही वजह थी कि कुछ सेकंड का यह वीडियो लोगों के दिलों को छू गया।
 
 
 
आज के दौर में, जब सार्वजनिक मंचों पर सुरक्षा, नियम और औपचारिकता सबसे ऊपर दिखाई देती है, उस पल में कुछ अलग था। एक बुजुर्ग सामाजिक कार्यकर्ता का स्नेह, राष्ट्रपति का सम्मान और दोनों का एक-दूसरे को गले लगाना।
 
जब इंसानियत प्रोटोकॉल से बड़ी हो गई

हिरबाई इब्राहिम लोबी की कहानी केवल पद्मश्री पाने की कहानी नहीं है। यह उस महिला की कहानी है, जिसने अपना जीवन दूसरों को आगे बढ़ाने में लगा दिया। जिसने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की। जिसने अनाथ बच्चों की शिक्षा के लिए काम किया। और जब देश के सबसे बड़े सम्मानों में से एक लेने राष्ट्रपति भवन पहुंचीं, तो वहां भी वह अपनी सादगी नहीं भूलीं। शायद यही उनकी सबसे बड़ी पहचान है। वायरल वीडियो का वह पल हमें याद दिलाता है कि पद और प्रोटोकॉल अपनी जगह हैं, लेकिन सच्चा अपनापन किसी औपचारिकता का मोहताज नहीं होता।
 
हिरबाई ने राष्ट्रपति को आशीर्वाद दिया... राष्ट्रपति ने उन्हें गले लगा लिया... और कुछ ही सेकंड में एक पुरस्कार समारोह का पल इंसानियत की खूबसूरत मिसाल बन गया।