NEET लीक केस: NTA बदलाव की मांग

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 14-05-2026
NEET leak case: NTA demands changes
NEET leak case: NTA demands changes

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
उच्चतम न्यायालय में दायर एक याचिका में एनटीए का पुनर्गठन या प्रतिस्थापन करने और नीट-यूजी आयोजित करने के वास्ते एक मजबूत एवं स्वायत्त प्रणाली बनाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता ने अपने अनुरोध के साथ बार-बार प्रश्नपत्र लीक होने के कारण 22.7 लाख से अधिक छात्रों के मौलिक अधिकारों पर ‘‘प्रत्यक्ष हमले’’ का हवाला दिया है।
 
‘द फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन’ (एफएआईएमए) ने अधिवक्ता तन्वी दुबे के जरिये दाखिल अर्जी में अनुरोध किया है कि जब तक पुनर्परीक्षा की देखरेख के लिए औपचारिक रूप से एक नए निकाय का गठन नहीं हो जाता, तब तक उच्चाधिकार प्राप्त एक निगरानी समिति नियुक्त की जाए।
 
याचिका में कहा गया कि इस समिति में उच्चतम न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को अध्यक्ष नियुक्त किया जाए, साथ ही एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और एक फॉरेंसिक वैज्ञानिक शामिल किए जाएं ताकि भविष्य में पेपर लीक होने की कोई घटना न हो।
 
चिकित्सा स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने तीन मई को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) आयोजित की थी, लेकिन प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बीच 12 मई यह परीक्षा रद्द कर दी गई। इस पूरे प्रकरण की अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा जांच की जा रही है।
 
एफएआईएमए द्वारा दाखिल याचिका में एनटीए, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और सीबीआई को पक्षकार बनाया गया है।
 
इसमें कहा गया है, ‘‘वर्तमान रिट याचिका में एनटीए द्वारा नीट-यूजी आयोजित करने में बार-बार, व्यवस्थित और अनर्थकारी विफलता के खिलाफ इस माननीय न्यायालय से तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया जाता है।’’
 
याचिका के मुताबिक, राजस्थान पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) ने खुलासा किया कि व्हाट्सऐप और टेलीग्राम पर प्रसारित ‘संभावित प्रश्नपत्रों’ में 120 ऐसे प्रश्न थे जो नीट-यूजी 2026 परीक्षा के वास्तविक जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान अनुभागों में पूछे गए प्रश्नों के समान थे।
 
इसमें कहा गया कि एनटीए द्वारा 5जी जैमर, जीपीएस ट्रैकिंग और एआई-निगरानी वाले कैमरों सहित उच्च-तकनीकी सुरक्षा उपायों का उपयोग करने के दावों के बावजूद, ये उपाय ‘केवल कागजों पर’ ही प्रतीत होते हैं।
 
याचिका में कहा गया, ‘‘पूर्व में प्रश्नपत्र लीक के मामलों के बाद की गई सिफारिश के अनुसार, प्रश्न पत्रों को ‘डिजिटल रूप से लॉक’ करने और ‘कंप्यूटर आधारित परीक्षा’ (सीबीटी) मॉडल में परिवर्तन को सीधे अनिवार्य किया जाए, ताकि भौतिक रूप से प्रश्नों की सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को समाप्त किया जा सके।’’