आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
जमात-ए-इस्लामी हिंद ने कर्नाटक सरकार के उस फैसले का बृहस्पतिवार को स्वागत किया जिसमें विद्यार्थियों को शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनने की अनुमति दी गई है और इसे धार्मिक स्वतंत्रता तथा शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया।
कर्नाटक की जमात-ए-इस्लामी हिंद के अमीर-ए-हलका मोहम्मद साद बेलगामी ने यहां जारी एक बयान में कहा कि इस फैसले से मुस्लिम छात्राएं बिना किसी डर, अनिश्चितता या अनावश्यक बाधाओं के अपनी शिक्षा जारी रख सकेंगी।
उन्होंने दावा किया कि हिजाब के मुद्दे ने पिछले कुछ वर्षों में शैक्षणिक माहौल को प्रभावित किया है और विद्यार्थियों तथा उनके परिवारों के बीच चिंता पैदा की है।
बेलगामी ने बयान में कहा, ‘‘शैक्षणिक संस्थान सुरक्षित स्थान होने चाहिए जहां विद्यार्थी गरिमा, आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना के साथ अपनी शिक्षा प्राप्त कर सकें।’’
उन्होंने कहा कि पांच फरवरी, 2022 के सरकारी आदेश को वापस लेना भारत के संविधान में निहित धार्मिक स्वतंत्रता, शैक्षणिक अधिकारों और अन्य सुरक्षा उपायों की संवैधानिक गारंटी के प्रति सम्मान को दर्शाता है।
उन्होंने शिक्षा विभाग और शिक्षण संस्थानों के प्रबंधन से भी इस निर्णय को सौहार्दपूर्ण तरीके से लागू करने और यह सुनिश्चित करने की अपील की कि परिसर में शांतिपूर्ण, सम्मानजनक और गरिमामय माहौल हो और यह सभी प्रकार के भेदभाव से मुक्त रहे।
कर्नाटक सरकार ने 13 मई को एक आदेश जारी कर विद्यार्थियों को स्कूलों में हिजाब, जनेऊ, शिवधारा और रुद्राक्ष (धार्मिक प्रतीक) पहनने की अनुमति दी।
वर्ष 2022 में हिजाब बनाम भगवा पटका को लेकर राज्यव्यापी विवाद के मद्देनजर, भाजपा सरकार ने सरकारी स्कूल परिसरों में हिजाब पर प्रतिबंध लगा दिया था।