प्रारंभिक जांच के अनुसार आग की शुरुआत इमारत के रसोईघर में हुए शॉर्ट सर्किट से हुई, जिसके बाद आग तेजी से ऊपरी मंजिलों तक फैल गई। चारों तरफ धुआं, चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल था। लोग अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों और बालकनियों से मदद की गुहार लगा रहे थे।
लेकिन इसी भयावह मंजर के बीच एक नाम लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरा—वसीम राजा।
स्थानीय निवासी वसीम राजा उन पहले लोगों में शामिल थे जो आग लगते ही घटनास्थल पर पहुंचे। जब अधिकांश लोग दूर खड़े होकर आग की भयावहता देख रहे थे, तब वसीम और उनके साथियों ने बिना अपनी जान की परवाह किए राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया।
वसीम राजा ने बताया कि जैसे ही उन्हें शॉर्ट सर्किट और आग लगने की सूचना मिली, वे तुरंत मौके पर पहुंच गए। उन्होंने देखा कि कई लोग ऊपर की मंजिलों में फंसे हुए हैं और जान बचाने के लिए नीचे कूदने को मजबूर हैं।
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए वसीम ने पास की एक गद्दे की दुकान से कई गद्दे मंगवाए और उन्हें सड़क पर बिछा दिया ताकि ऊपर से कूदने वाले लोगों की जान बचाई जा सके।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यदि वसीम और उनके साथियों ने यह त्वरित निर्णय नहीं लिया होता, तो मृतकों की संख्या कहीं अधिक हो सकती थी।
आग लगातार फैल रही थी और धुएं के कारण इमारत के अंदर सांस लेना मुश्किल हो गया था। ऐसे में वसीम राजा और स्थानीय लोगों ने दमकल कर्मियों और पुलिस के साथ मिलकर अंदर फंसे लोगों को निकालने का अभियान चलाया।
उन्होंने कई विदेशी नागरिकों को बेहोशी की हालत में बाहर निकाला। कई बार उन्हें धुएं और टूटे हुए शीशों के बीच से गुजरना पड़ा। इस दौरान उनके पैरों में भी चोटें आईं, लेकिन उन्होंने बचाव कार्य नहीं छोड़ा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वसीम ने उस समय जो साहस दिखाया, वह किसी पेशेवर रेस्क्यू कर्मी से कम नहीं था। उनकी बहादुरी और मानवता ने कई परिवारों को अपने प्रियजनों को जीवित वापस पाने का अवसर दिया।
हादसे के बाद मालवीय नगर क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों की आंखें नम थीं। कई परिवार अपने प्रियजनों की तलाश में अस्पतालों और राहत केंद्रों के चक्कर लगाते रहे।
दमकल विभाग की कई गाड़ियों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। बचाव दल ने इमारत के विभिन्न हिस्सों से लोगों को निकालकर अस्पताल पहुंचाया।
हालांकि, कई घायलों की स्थिति अभी भी गंभीर बताई जा रही है, जिसके कारण मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
इस दर्दनाक हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी प्रार्थनाएं प्रभावित परिवारों के साथ हैं।
प्रधानमंत्री ने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और प्रशासन को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
साथ ही प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।
मालवीय नगर अग्निकांड ने एक बार फिर दिल्ली में लगातार सामने आ रही आग की घटनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इमारतों में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन न होना और विद्युत व्यवस्था में लापरवाही ऐसे हादसों की बड़ी वजह बन रही है।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा मानकों की जांच और निगरानी की जाए तो ऐसी त्रासदियों को रोका जा सकता है।
जब इतिहास इस दर्दनाक हादसे को याद करेगा, तब उन 21 लोगों की दुखद मौतों के साथ-साथ एक ऐसे इंसान का नाम भी याद किया जाएगा जिसने संकट की घड़ी में इंसानियत का सबसे बड़ा उदाहरण पेश किया।
वसीम राजा ने यह साबित कर दिया कि हीरो बनने के लिए किसी वर्दी या पद की जरूरत नहीं होती। जरूरत होती है साहस, संवेदनशीलता और दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने के जज्बे की।
मालवीय नगर की इस त्रासदी में जहां चारों ओर दर्द और मातम का माहौल है, वहीं वसीम राजा की बहादुरी और मानवता लोगों के दिलों में उम्मीद की एक नई रोशनी बनकर उभरी है।