कश्मीर घाटी में धान की रोपाई तेज, खेतों में जुटे अन्नदाता

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 03-06-2026
Paddy Transplantation Picks Up Pace in Kashmir Valley; Farmers Hard at Work in the Fields.
Paddy Transplantation Picks Up Pace in Kashmir Valley; Farmers Hard at Work in the Fields.

 

बासित जरगर/श्रीनगर

कश्मीर घाटी में इस समय खेती की सरगर्मियां बहुत तेज हो गई हैं। धान की रोपाई का सालाना सीजन अब पूरी तरह रफ्तार पकड़ चुका है। घाटी के किसान इन दिनों अपने खेतों में पसीना बहा रहे हैं। वे सुबह से लेकर शाम तक पानी से भरे खेतों में काम करते दिख रहे हैं। उनका लक्ष्य बस एक ही है। वे सही समय पर धान के पौधों का प्रत्यारोपण पूरा कर लेना चाहते हैं। कृषि के लिहाज से यह साल का सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समय माना जाता है।

ff

कश्मीर के अलग-अलग जिलों में इस समय हरियाली छाने लगी है। बड़गाम और पुलवामा के उपजाऊ मैदान इस बात की गवाही दे रहे हैं। इसके साथ ही अनंतनाग और बांदीपोरा जैसे बड़े धान उत्पादक क्षेत्रों में भी रौनक लौट आई है। कृषि भूमि के बड़े-बड़े हिस्से अब हरे रंग में बदलने लगे हैं। काश्तकारों ने साल की अपनी सबसे मुख्य खेती की गतिविधि शुरू कर दी है।

खेती को हमेशा से कश्मीर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना गया है। यहां हजारों परिवारों के लिए भोजन की सुरक्षा इसी पर टिकी है। इस लिहाज से धान की खेती बहुत बड़ा रोल निभाती है। इस साल मौसम का मिजाज अच्छा दिख रहा है। सिंचाई के लिए नहरों और नालों में पानी की कोई कमी नहीं है। पर्याप्त पानी मिलने से इस बार घाटी के किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। वे बेहतर फसल को लेकर काफी उम्मीदें जता रहे हैं।

ff

बड़गाम के गांवों में दिखा पारंपरिक नजारा

बड़गाम जिले के वथूरा गांव में इन दिनों सुबह से ही हलचल शुरू हो जाती है। यहां किसानों के समूह पानी से भरे खेतों में चावल के छोटे पौधों की रोपाई करते नजर आ रहे हैं। इस काम में केवल पुरुष ही शामिल नहीं हैं। उनके साथ उनके परिवार की महिलाएं और बुजुर्ग भी कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। यहां तक कि बच्चे भी इस काम में हाथ बंटा रहे हैं। यह कोई आज की शुरुआत नहीं है। कश्मीर में पीढ़ियों से धान की रोपाई इसी पारंपरिक तरीके से एक उत्सव की तरह की जाती रही है।

वथूरा गांव के रहने वाले एक किसान अब्दुल रशीद ने अपनी बात साझा की। उन्होंने बताया कि हमने पिछले हफ्ते ही रोपाई का काम शुरू कर दिया था। अब तक मौसम ने हमारा पूरा साथ दिया है। इस समय सिंचाई के लिए खेतों में पानी का स्तर बिल्कुल सही है। अगर आने वाले महीनों में भी स्थितियां ऐसी ही बनी रहीं तो इस बार धान की पैदावार बहुत अच्छी होने की उम्मीद है।

ff

कृषि विभाग ने कसी कमर

कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि धान की रोपाई का काम लगभग सभी जिलों में बहुत सुचारू रूप से चल रहा है। विभाग की ओर से किसानों को कुछ खास सलाह भी दी जा रही है। अधिकारियों ने किसानों से कहा है कि वे खेती की आधुनिक तकनीकों को अपनाएं। उत्पादकता बढ़ाने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले और अधिक उपज देने वाले बीजों का इस्तेमाल करें।

कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हम इस पूरी प्रक्रिया पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। जहां भी जरूरत पड़ रही है, वहां किसानों को तकनीकी सहायता दी जा रही है। विभाग ने इस बार समय पर उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का वितरण किया है। हम लगातार किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। इसका सीधा फायदा उत्पादन बढ़ाने में मिलेगा।

gg

बढ़ती लागत बनी बड़ी चुनौती

पुलवामा जिले के किसान गुलाम मोहम्मद ने खेती की एक दूसरी तस्वीर भी सामने रखी। उन्होंने बताया कि इस बार फसल को लेकर उम्मीदें तो बहुत अच्छी हैं। इसके बावजूद खेती की बढ़ती लागत हमारे लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। पिछले कुछ सालों में खादों, कीटनाशकों, मजदूरी और ट्रैक्टर जैसी मशीनों का किराया बहुत ज्यादा बढ़ गया है।

गुलाम मोहम्मद ने आगे कहा कि खर्च बढ़ने के बाद भी हम इस काम को नहीं छोड़ सकते। धान की खेती ही हमारी आजीविका का प्राथमिक स्रोत है। हमारी पूरी जिंदगी इसी पर टिकी है। इसलिए हम तमाम दिक्कतों के बाद भी मेहनत कर रहे हैं। हमें पूरी उम्मीद है कि यह सीजन हमारे लिए एक सफल सीजन साबित होगा।

ff

समय पर रोपाई का महत्व

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर पैदावार के लिए समय पर रोपाई करना सबसे जरूरी कदम है। अगर सही समय पर पौधे खेतों में नहीं लगाए गए तो फसल में बीमारियां लगने का खतरा बहुत बढ़ जाता है। विशेषज्ञों ने किसानों से पानी के सही प्रबंधन पर ध्यान देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पूरी फसल के दौरान कृषि विभाग द्वारा बताए गए नियमों का पालन जरूर करें।

जैसे-जैसे घाटी में खेती की गतिविधियां तेज हो रही हैं, वैसे-वैसे स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ गई है। बाजारों में इस समय कृषि उपकरणों की मांग बहुत ज्यादा है। इसके अलावा खादों और अन्य कृषि सामग्री की बिक्री भी काफी बढ़ गई है। ग्रामीण इलाकों में इस समय अच्छी आर्थिक गतिविधि देखने को मिल रही है। रोपाई के इस सीजन में स्थानीय और मौसमी मजदूरों को भी बड़े पैमाने पर रोजगार मिल रहा है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार कश्मीर में हर साल हजारों हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती की जाती है। यह फसल पूरे क्षेत्र के कुल कृषि उत्पादन में एक बहुत बड़ा योगदान देती है। अभी लगाए जा रहे पौधे साल के अंत तक पूरी तरह तैयार हो जाएंगे। इसके बाद पतझड़के मौसम में यानी शरद ऋतु की शुरुआत में धान की कटाई का काम शुरू होगा।

तपती धूप के बीच किसान खेतों में डटे हुए हैं। उनके माथे पर पसीना है लेकिन आंखों में एक अच्छी फसल की उम्मीद है। ग्रामीण इलाकों के अधिकांश परिवारों के लिए यह सिर्फ एक फसल नहीं है। इस सीजन की सफलता ही तय करेगी कि पूरे साल उनके घर की आमदनी कैसी रहेगी और उनके पास भोजन की कितनी सुरक्षा होगी। यही कारण है कि इस समय चल रहा यह सीजन कश्मीर के कृषि कैलेंडर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।