Cabinet approves Rs 8,300 cr coastal highway from Rameshwar to Paradeep in Odisha
नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने बुधवार को ओडिशा में रामेश्वर से पारादीप तक एक नए तटीय राजमार्ग के निर्माण को मंजूरी दे दी। यह निर्माण 'हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल' (HAM) के तहत दो पैकेजों में किया जाएगा, जिसकी कुल लंबाई 160.18 किलोमीटर होगी और इस पर कुल 8300.79 करोड़ रुपये की पूंजीगत लागत आएगी। आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) के अनुसार, रामेश्वर से पारादीप तक बनने वाले इस नए तटीय राजमार्ग का प्रोजेक्ट-सेक्शन ओडिशा के खुर्दा, पुरी, केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर जिलों से होकर गुजरेगा। NH-16 का मौजूदा सड़क नेटवर्क 'स्वर्णिम चतुर्भुज' (Golden Quadrilateral) का हिस्सा है और यह पहले से ही एक 6-लेन का राजमार्ग है, जो खुर्दा, भुवनेश्वर और कटक जैसे प्रमुख शहरों से होकर गुजरता है।
मौजूदा NH-316 भुवनेश्वर-पुरी को जोड़ता है और आगे सतपाड़ा तथा कोणार्क की ओर बढ़ता है। पुरी-सतपाड़ा और पुरी-कोणार्क खंडों पर मौजूदा सड़क की बनावट (geometry) खराब है; इस कॉरिडोर के लगभग 40% हिस्से में सड़कों के किनारे अनियोजित निर्माण (ribbon development) हो चुका है और सड़क के किनारे स्थानीय यात्रियों का आवागमन भी बहुत अधिक रहता है। इन कारणों से यह कॉरिडोर लंबी दूरी के वाहनों के सुचारू और कुशल आवागमन के लिए उपयुक्त नहीं रह गया है।
प्रस्तावित परियोजनाओं के तहत रामेश्वर से कोणार्क (पैकेज-1) तक 4-लेन का निर्माण किया जाएगा, जबकि कोणार्क से पारादीप (पैकेज-2) तक पक्के शोल्डर (paved shoulder) के साथ 2-लेन की सड़क बनाई जाएगी। इससे 100 किलोमीटर प्रति घंटे की डिज़ाइन गति सुनिश्चित होगी और ओडिशा राज्य के खुर्दा, पुरी, केंद्रपाड़ा तथा जगतसिंहपुर जिलों में यात्रा की दक्षता में सुधार होगा। यह परियोजना क्षेत्रीय गतिशीलता को भी बढ़ाएगी और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी।
ये परियोजनाएं 'पीएम गतिशक्ति' के सिद्धांतों के अनुरूप हैं और 9 आर्थिक केंद्रों (Economic Nodes) तथा 5 लॉजिस्टिक केंद्रों (Logistic Nodes) को आपस में जोड़ेंगी। इसका देश के 'लॉजिस्टिक परफॉर्मेंस इंडेक्स' (LPI) पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। परियोजना पूरी होने के बाद, रामेश्वर और पारादीप के बीच यात्रा का समय लगभग 2 घंटे 30 मिनट कम होने की उम्मीद है। साथ ही, इससे यात्री और माल-ढुलाई, दोनों तरह के यातायात के लिए सुरक्षित, तेज और निर्बाध कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। इसके अतिरिक्त, इस परियोजना के परिणामस्वरूप ईंधन की खपत, कार्बन उत्सर्जन और वाहनों के परिचालन खर्च (VOC) में भी काफी कमी आएगी।