मोदी ने सेशेल्स के नेताओं को कांचीवरम, महेश्वरी रेशम और मुरादाबादी पीतल का कछुआ भेंट किया

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 30-06-2026
Maheshwari silk and Moradabad brass tortoise to Seychelles leaders
Maheshwari silk and Moradabad brass tortoise to Seychelles leaders

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सेशेल्स की अपनी हालिया यात्रा के दौरान वहां के शीर्ष नेताओं और उनके जीवनसाथियों को कांचीपुरम रेशम के वस्त्र, महेश्वरी रेशम के स्टोल और टोडा कढ़ाई वाला शॉल जैसे तोहफे दिए।

मोदी 27 से 29 जून तक तीन दिवसीय यात्रा पर सेशेल्स गए थे। इस दौरान उन्होंने द्विपीय देश के राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह में हिस्सा लिया और राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय बातचीत की, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में और प्रगाढ़ता आई।
 
प्रधानमंत्री ने सेशेल्स के राष्ट्रपति को मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) की मशहूर पीतल का बना कछुआ भेंट किया।
 
मुरादाबाद के कुशल कारीगरों द्वारा हाथ से तैयार किया गया यह तोहफा, धातु की ढलाई, नक्काशी में उस इलाके की विशेषज्ञता को प्रतिबिंबित करता है। मुरादाबाद को दुनिया भर में भारत की ‘पीतल नगरी’ के तौर पर जाना जाता है।
 
भारतीय दर्शन में, कछुआ ज्ञान, स्थिरता, सहनशक्ति और लंबी उम्र का प्रतीक है। ये आदर्श सेशेल्स के साथ गहराई से जुड़े हैं, क्योंकि वहां की प्राकृतिक विरासत मशहूर ‘अल्डाब्रा जाइंट टॉर्टॉइज़’ से जुड़ी है, जो दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाली कछुआ प्रजातियों में से एक है।
 
मोदी ने अपनी यात्रा के दौरान सेशेल्स के नेशनल बॉटनिकल गार्डन में विशाल कछुए के बाड़े का भी दौरा किया।
 
प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की प्रथम महिला वेरोनिक हर्मिनी को महेश्वरी सिल्क स्टोल और बिदरी कला से सुसज्जित आभूषण रखने के डिब्बे को उपहार में दिया।
 
महेश्वरी रेशम स्टोल भारत की हथकरघा विरासत का एक शानदार नमूना है। मध्य प्रदेश के महेश्वर से शुरू हुई यह कपड़ा बुनाई की परंपरा अपनी बेहतरीन कारीगरी और रेशम व सूती धागों के शानदार मेल के लिए जानी जाती है।
 
बिदरी कला से तैयार आभूषण रखने का डिब्बा भारत की मशहूर धातु कला का उदाहरण है। यह गहरे काले रंग की धातु की सतह पर चमकदार चांदी की जड़ावट के लिए जाना जाता है।
 
बिदरी कला की शुरुआत कर्नाटक के बीदर से हुई, और इसी वजह से इसका यह नाम पड़ा। इस कला में जस्ता और तांबे के मिश्रण को ढालकर आकार दिया जाता है, उसकी सतह पर बारीक नक्काशी की जाती है और फिर उसमें चांदी जड़ी जाती है।
 
मोदी ने सेशेल्स के उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिल्लै को सिक्किम की एक ऑर्किड पेंटिंग भेंट की।
 
यह पेंटिंग सिक्किम की समृद्ध फूलों की विरासत और उसकी जीवंत कलात्मक परंपराओं का मेल है। इस कलाकृति में भारत के राष्ट्रीय पक्षी, मोर को दिखाया गया है, जो बारीक फूलों वाली बेलों के बीच नाजुक ऑर्किड के फूलों से सजा है। यह प्रकृति और कलात्मक अभिव्यक्ति के सामंजस्य को प्रदर्शित करती है।
 
मोदी ने सेशेल्स की द्वितीय महिला लीना पिल्लै को कांचीपुरम रेशमी वस्त्र उपहार में दिया। यह भारत की सबसे मशहूर हथकरघा परंपराओं में से एक है, जो अपनी शानदार बनावट, चटख रंगों और बेहतरीन कारीगरी के लिए जानी जाती है।
 
तमिलनाडु के ऐतिहासिक कांचीपुरम शहर में बनने वाला यह कपड़ा बेहतरीन मलबरी रेशम से बुना जाता है और अपनी मज़बूती और बारीक ‘ज़री’ के काम के लिए पहचाना जाता है।
 
मोदी ने सेशेल्स की नेशनल असेंबली के अध्यक्ष अज़ारेल अर्नेस्टा को ‘टोडा’ कढ़ाई वाला शॉल भेंट किया। यह शॉल तमिलनाडु की नीलगिरि पहाड़ियों में रहने वाले मूल निवासियों ‘टोडा’ की एक खास वस्त्र-कला परंपरा है।है।ना नियुक्तियां की हैं।
मोदी 27 से 29 जून तक तीन दिवसीय यात्रा पर सेशेल्स गए थे। इस दौरान उन्होंने द्विपीय देश के राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह में हिस्सा लिया और राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय बातचीत की, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में और प्रगाढ़ता आई।
 
प्रधानमंत्री ने सेशेल्स के राष्ट्रपति को मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) की मशहूर पीतल का बना कछुआ भेंट किया।
 
मुरादाबाद के कुशल कारीगरों द्वारा हाथ से तैयार किया गया यह तोहफा, धातु की ढलाई, नक्काशी में उस इलाके की विशेषज्ञता को प्रतिबिंबित करता है। मुरादाबाद को दुनिया भर में भारत की ‘पीतल नगरी’ के तौर पर जाना जाता है।
 
भारतीय दर्शन में, कछुआ ज्ञान, स्थिरता, सहनशक्ति और लंबी उम्र का प्रतीक है। ये आदर्श सेशेल्स के साथ गहराई से जुड़े हैं, क्योंकि वहां की प्राकृतिक विरासत मशहूर ‘अल्डाब्रा जाइंट टॉर्टॉइज़’ से जुड़ी है, जो दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाली कछुआ प्रजातियों में से एक है।
 
मोदी ने अपनी यात्रा के दौरान सेशेल्स के नेशनल बॉटनिकल गार्डन में विशाल कछुए के बाड़े का भी दौरा किया।
 
प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की प्रथम महिला वेरोनिक हर्मिनी को महेश्वरी सिल्क स्टोल और बिदरी कला से सुसज्जित आभूषण रखने के डिब्बे को उपहार में दिया।
 
महेश्वरी रेशम स्टोल भारत की हथकरघा विरासत का एक शानदार नमूना है। मध्य प्रदेश के महेश्वर से शुरू हुई यह कपड़ा बुनाई की परंपरा अपनी बेहतरीन कारीगरी और रेशम व सूती धागों के शानदार मेल के लिए जानी जाती है।
 
बिदरी कला से तैयार आभूषण रखने का डिब्बा भारत की मशहूर धातु कला का उदाहरण है। यह गहरे काले रंग की धातु की सतह पर चमकदार चांदी की जड़ावट के लिए जाना जाता है।
 
बिदरी कला की शुरुआत कर्नाटक के बीदर से हुई, और इसी वजह से इसका यह नाम पड़ा। इस कला में जस्ता और तांबे के मिश्रण को ढालकर आकार दिया जाता है, उसकी सतह पर बारीक नक्काशी की जाती है और फिर उसमें चांदी जड़ी जाती है।
 
मोदी ने सेशेल्स के उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिल्लै को सिक्किम की एक ऑर्किड पेंटिंग भेंट की।
 
यह पेंटिंग सिक्किम की समृद्ध फूलों की विरासत और उसकी जीवंत कलात्मक परंपराओं का मेल है। इस कलाकृति में भारत के राष्ट्रीय पक्षी, मोर को दिखाया गया है, जो बारीक फूलों वाली बेलों के बीच नाजुक ऑर्किड के फूलों से सजा है। यह प्रकृति और कलात्मक अभिव्यक्ति के सामंजस्य को प्रदर्शित करती है।
 
मोदी ने सेशेल्स की द्वितीय महिला लीना पिल्लै को कांचीपुरम रेशमी वस्त्र उपहार में दिया। यह भारत की सबसे मशहूर हथकरघा परंपराओं में से एक है, जो अपनी शानदार बनावट, चटख रंगों और बेहतरीन कारीगरी के लिए जानी जाती है।
 
तमिलनाडु के ऐतिहासिक कांचीपुरम शहर में बनने वाला यह कपड़ा बेहतरीन मलबरी रेशम से बुना जाता है और अपनी मज़बूती और बारीक ‘ज़री’ के काम के लिए पहचाना जाता है।
 
मोदी ने सेशेल्स की नेशनल असेंबली के अध्यक्ष अज़ारेल अर्नेस्टा को ‘टोडा’ कढ़ाई वाला शॉल भेंट किया। यह शॉल तमिलनाडु की नीलगिरि पहाड़ियों में रहने वाले मूल निवासियों ‘टोडा’ की एक खास वस्त्र-कला परंपरा है।है।ना नियुक्तियां की हैं।