आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
प्रख्यात शिक्षाविद और पूर्व राज्यसभा सदस्य डॉ. जनार्दन वाघमारे का अंतिम संस्कार मंगलवार को महाराष्ट्र के लातूर जिले स्थित उनके गांव में किया गया।
वाघमारे (91) का सोमवार को लातूर स्थित उनके आवास पर संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया था।
जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर औसा तहसील के कवठा गांव में वाघमारे के अंतिम संस्कार के समय राज्य के मंत्री बाबासाहेब पाटिल, कांग्रेस विधायक अमित देशमुख, राकांपा के संजय बनसोडे, सांसद शिवाजी कलगे सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद थे।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के संस्थापक शरद पवार के करीबी सहयोगी रहे वाघमारे शिक्षा, साहित्य तथा सार्वजनिक जीवन में अपने योगदान के लिए जाने जाते रहे।
नांदेड़ में स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी के संस्थापक कुलपति रह चुके वाघमारे का जन्म 11 नवंबर 1934 को हुआ था। वह वर्ष 2008 से 2014 तक महाराष्ट्र से राज्यसभा सदस्य रहे और अपने संसदीय कार्यकाल के दौरान कृषि, मानव संसाधन विकास, रक्षा और विदेश मामलों से संबंधित संसदीय समितियों में सदस्य रहे।
उन्होंने वर्ष 2001 से 2006 तक लातूर नगर परिषद के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। वाघमारे ने लातूर में राजर्षि शाहू महाविद्यालय की स्थापना की और उसके प्राचार्य रहे। उन्हें ‘लातूर पैटर्न’ का शिल्पकार माना जाता है, जो बोर्ड और प्रवेश परीक्षाओं में क्षेत्र के विद्यार्थियों की उत्कृष्ट सफलता के लिए बेहतरीन मॉडल के तौर पर जाना जाता है।
वाघमारे ने शिक्षा, सामाजिक सुधार, दलित साहित्य, दर्शन विषयों पर मराठी, हिंदी और अंग्रेजी में 80 से अधिक पुस्तकें लिखीं। उन्हें महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार, यशवंतराव चव्हाण साहित्य पुरस्कार सहित कई सरकारी सम्मानों से नवाजा गया था।
वर्ष 2009 में वह संयुक्त राष्ट्र गए भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे और वैश्विक शांति के मुद्दे पर 150 देशों के प्रतिनिधियों को संबोधित किया।
वाघमारे (91) का सोमवार को लातूर स्थित उनके आवास पर संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया था।
जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर औसा तहसील के कवठा गांव में वाघमारे के अंतिम संस्कार के समय राज्य के मंत्री बाबासाहेब पाटिल, कांग्रेस विधायक अमित देशमुख, राकांपा के संजय बनसोडे, सांसद शिवाजी कलगे सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद थे।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के संस्थापक शरद पवार के करीबी सहयोगी रहे वाघमारे शिक्षा, साहित्य तथा सार्वजनिक जीवन में अपने योगदान के लिए जाने जाते रहे।
नांदेड़ में स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी के संस्थापक कुलपति रह चुके वाघमारे का जन्म 11 नवंबर 1934 को हुआ था। वह वर्ष 2008 से 2014 तक महाराष्ट्र से राज्यसभा सदस्य रहे और अपने संसदीय कार्यकाल के दौरान कृषि, मानव संसाधन विकास, रक्षा और विदेश मामलों से संबंधित संसदीय समितियों में सदस्य रहे।
उन्होंने वर्ष 2001 से 2006 तक लातूर नगर परिषद के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। वाघमारे ने लातूर में राजर्षि शाहू महाविद्यालय की स्थापना की और उसके प्राचार्य रहे। उन्हें ‘लातूर पैटर्न’ का शिल्पकार माना जाता है, जो बोर्ड और प्रवेश परीक्षाओं में क्षेत्र के विद्यार्थियों की उत्कृष्ट सफलता के लिए बेहतरीन मॉडल के तौर पर जाना जाता है।
वाघमारे ने शिक्षा, सामाजिक सुधार, दलित साहित्य, दर्शन विषयों पर मराठी, हिंदी और अंग्रेजी में 80 से अधिक पुस्तकें लिखीं। उन्हें महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार, यशवंतराव चव्हाण साहित्य पुरस्कार सहित कई सरकारी सम्मानों से नवाजा गया था।
वर्ष 2009 में वह संयुक्त राष्ट्र गए भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे और वैश्विक शांति के मुद्दे पर 150 देशों के प्रतिनिधियों को संबोधित किया।