आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अदालतों में लगातार झटके मिलने से अमेरिकी शुल्क व्यवस्था को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर आगे बढ़ने से पहले भारत को अमेरिका द्वारा अधिक स्थिर एवं कानूनी रूप से विश्वसनीय व्यापार ढांचा विकसित करने का इंतजार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह फैसला इस बात की ओर ध्यान आकर्षित करता है कि ट्रंप के वैश्विक शुल्क विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों का उल्लंघन करते थे। अमेरिकी अदालतों द्वारा इन्हें निरस्त किया जाना बहुपक्षीय व्यापार मानकों के लिए सकारात्मक संकेत है।
अमेरिका की एक संघीय अदालत ने देश के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ को एक और झटका देते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए 10 प्रतिशत वैश्विक शुल्क को ‘‘अवैध’’ और ‘‘कानून द्वारा अनधिकृत’’ करार देते हुए खारिज कर दिया है।
ट्रंप द्वारा पहले लगाए गए व्यापक शुल्कों को खारिज करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद अमेरिकी प्रशासन ने 24 फरवरी को भारत सहित सभी देशों पर 150 दिन के लिए नए शुल्क लगाए गए थे।
उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय आपात आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) शुल्क लगाने की अनुमति नहीं देता।
आर्थिक शोध संस्थान ‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव’ (जीटीआरआई) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘ अमेरिकी शुल्क नीति को लेकर जारी अनिश्चितता। अदालतों द्वारा ट्रंप के प्रमुख शुल्क बार-बार निरस्त करने से भारत के लिए किसी दीर्घकालिक व्यापार प्रतिबद्धता को उचित ठहराना मुश्किल होता जा रहा है।’’
उन्होंने कहा कि भारत को द्विपक्षीय व्यापार समझौता अंतिम रूप देने से पहले अमेरिका के अधिक स्थिर एवं कानूनी रूप से भरोसेमंद व्यापार तंत्र विकसित करने का इंतजार करना चाहिए।