Leaders are made not through uproar but through rational debate and serious discussion: Om Birla
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
विधानमंडल को राजनीतिक नेतृत्व की "प्रशिक्षणशाला" बताते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को जनप्रतिनिधियों से संसदीय परंपराओं का सम्मान करने तथा सार्थक बहस, अध्ययन और रचनात्मक भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
राजस्थान विधानसभा के 75वें स्थापना वर्ष समारोह को संबोधित करते हुए बिरला ने कहा कि सदन में हंगामा करने से नहीं, बल्कि तथ्यों पर आधारित तर्कपूर्ण बहस और गंभीर चर्चा से नेता तैयार होते हैं।
उन्होंने कहा कि उन्होंने संसदीय परंपराएं राजस्थान विधानसभा से ही सीखी हैं और इसी सदन ने उन्हें विधायी मूल्यों की सीख दी, जो आज तक उनके सार्वजनिक जीवन का मार्गदर्शन कर रही है।
बिरला ने कहा, "विधानमंडलों में दिए गए भाषण और हुई बहसें इतिहास का हिस्सा बन जाती हैं और वर्षों तक उनका अध्ययन किया जाता है। कोई सदस्य जितना अधिक सुनेगा और अध्ययन करेगा, वह उतना ही बेहतर योगदान दे सकेगा।"
उन्होंने कहा कि विधानमंडल लोकतांत्रिक विमर्श का ऐसा मंच है, जहां सरकार पूरे राज्य के लोगों की अपेक्षाओं, समस्याओं, आलोचनाओं और चुनौतियों को समझ सकती है।
उन्होंने कहा, "यदि सरकार सदन में उठाए गए मुद्दों का गंभीरता से अध्ययन करे तो समस्याओं की जड़ तक पहुंचकर उनके प्रभावी समाधान तलाशे जा सकते हैं।"
बिरला ने राजस्थान विधानसभा को "विधायी मूल्यों की पाठशाला" बताते हुए कहा कि यह जनप्रतिनिधियों के पूरे राजनीतिक जीवन का मार्गदर्शन करने की क्षमता रखती है। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि वे विधायकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के सटीक और स्पष्ट उत्तर दें।
उन्होंने कहा कि विधानसभा और संसद ऐसे मंच हैं, जहां से राज्य और देश के नेतृत्व का निर्माण होता है।