फल्गु देवघाट पर लेजर शो शुरू, दिखेगी गयाजी की धार्मिक विरासत

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 26-09-2026
Laser show begins at Falgu Devghat; Gaya-ji's religious heritage to be showcased.
Laser show begins at Falgu Devghat; Gaya-ji's religious heritage to be showcased.

 

गया

पितृपक्ष के दौरान जब देश-विदेश से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के तर्पण और पिंडदान के लिए गयाजी पहुंचते हैं, तब फल्गु नदी का देवघाट धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। इसी धार्मिक वातावरण को एक नई और आधुनिक प्रस्तुति देने के लिए फल्गु देवघाट पर लेजर लाइट शो की शुरुआत की गई है। रंग-बिरंगी रोशनी और आधुनिक तकनीक के माध्यम से अब श्रद्धालु गयाजी की धार्मिक, पौराणिक और सांस्कृतिक विरासत को एक अलग अंदाज में देख सकेंगे।

लेजर लाइट शो का उद्घाटन मगध प्रमंडल की आयुक्त डॉ. सफीना एएन, मगध रेंज के आईजी विकास वैभव, मेयर वीरेंद्र कुमार उर्फ गणेश पासवान, नगर आयुक्त डॉ. गगन कुमार और पूर्व डिप्टी मेयर एवं सशक्त स्थायी समिति के सदस्य अखौरी ओंकार नाथ उर्फ मोहन श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से किया।

इस शो को खास तौर पर पितृपक्ष मेले के दौरान गयाजी आने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन करना नहीं, बल्कि गयाजी की धार्मिक पहचान और सदियों पुरानी परंपराओं को आधुनिक तकनीक के जरिए लोगों तक पहुंचाना भी है।

 

 

लेजर किरणों में दिखेगी फल्गु नदी की महत्ता

गयाजी की धार्मिक पहचान में फल्गु नदी का विशेष महत्व है। पिंडदान और तर्पण की परंपरा से इसका गहरा संबंध माना जाता है। देवघाट पर शुरू किए गए लेजर शो में फल्गु नदी की इसी धार्मिक महत्ता को रोशनी और दृश्य प्रस्तुति के माध्यम से दिखाया जाएगा।

शो में गयाजी की पौराणिक मान्यताओं, धार्मिक स्थलों और पिंडदान की परंपरा से जुड़े प्रसंगों को भी शामिल किया गया है। श्रद्धालुओं को लेजर प्रोजेक्शन के माध्यम से भगवान विष्णु के चरणचिह्न और गयाजी से जुड़ी अन्य धार्मिक मान्यताओं की जानकारी दी जाएगी।

माता सीता और राजा दशरथ के पिंडदान की कथा भी होगी प्रदर्शित

लेजर शो का एक प्रमुख हिस्सा माता सीता द्वारा राजा दशरथ के पिंडदान से जुड़ी धार्मिक कथा है। गयाजी की धार्मिक परंपरा में इस कथा का विशेष स्थान माना जाता है। शो के जरिए इस प्रसंग को दृश्य और प्रकाश तकनीक के माध्यम से आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।

मान्यता के अनुसार, भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता जब गयाजी आए थे, तब राजा दशरथ के पिंडदान से जुड़ा प्रसंग फल्गु नदी के तट पर हुआ था। इसी धार्मिक मान्यता को लेजर शो में कहानी के रूप में दिखाने की कोशिश की गई है, ताकि श्रद्धालु गयाजी की परंपराओं को केवल धार्मिक अनुष्ठान के रूप में नहीं, बल्कि उससे जुड़ी पौराणिक कथाओं के संदर्भ में भी समझ सकें।

आधुनिक तकनीक से पुरानी विरासत की प्रस्तुति

फल्गु देवघाट पर तैयार किए गए शो में रंग-बिरंगी रोशनी के साथ आधुनिक लेजर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसका मकसद गयाजी की प्राचीन धार्मिक विरासत को वर्तमान समय की दृश्य तकनीक के साथ जोड़ना है।

पितृपक्ष के दौरान बड़ी संख्या में लोग गयाजी पहुंचते हैं। इनमें देश के अलग-अलग हिस्सों के अलावा विदेशों से आने वाले श्रद्धालु भी शामिल होते हैं। ऐसे में प्रशासन की कोशिश है कि धार्मिक अनुष्ठानों के साथ उन्हें गयाजी के इतिहास और धार्मिक महत्व को जानने-समझने का एक आकर्षक माध्यम भी उपलब्ध कराया जाए।

शाम के समय फल्गु नदी के किनारे होने वाला यह शो देवघाट के वातावरण को भी अलग रूप देगा। रोशनी के माध्यम से धार्मिक प्रसंगों की प्रस्तुति श्रद्धालुओं के लिए एक नया अनुभव होगी।

पितृपक्ष सिर्फ पिंडदान नहीं, धार्मिक विरासत से जुड़ने का अवसर

मेयर वीरेंद्र कुमार उर्फ गणेश पासवान ने कहा कि पितृपक्ष मेला केवल पिंडदान और तर्पण तक सीमित नहीं है। यह गयाजी की प्राचीन धार्मिक परंपराओं, संस्कृति और विरासत को देश-दुनिया के सामने रखने का अवसर भी है।

फल्गु देवघाट पर लेजर लाइट शो को इसी दिशा में एक पहल के तौर पर देखा जा रहा है। इसके जरिए श्रद्धालुओं को गयाजी की धार्मिक पहचान से जुड़े विभिन्न पहलुओं को आधुनिक तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा।

पूर्व डिप्टी मेयर और सशक्त स्थायी समिति के सदस्य अखौरी ओंकार नाथ उर्फ मोहन श्रीवास्तव ने भी गयाजी की धार्मिक महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गयाजी केवल पिंडदान की भूमि नहीं, बल्कि सनातन परंपरा की एक प्राचीन और महत्वपूर्ण तीर्थस्थली है।

श्रद्धालुओं के अनुभव को यादगार बनाने की कोशिश

पितृपक्ष के दौरान गयाजी में होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों में देश के विभिन्न हिस्सों से लोग शामिल होते हैं। कई श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं रहती, बल्कि गयाजी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का अवसर भी बनती है।

देवघाट पर शुरू किया गया लेजर शो इसी अनुभव को विस्तार देने की कोशिश है। यहां आने वाले श्रद्धालु शाम के समय रोशनी और दृश्य प्रभावों के माध्यम से फल्गु नदी, भगवान विष्णु के चरणचिह्न, पिंडदान की परंपरा और माता सीता से जुड़ी धार्मिक कथा को देख सकेंगे।

इस पहल के जरिए गयाजी की सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं को नई तकनीक के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है। पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच देवघाट का यह लेजर शो धार्मिक आस्था