मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी के निधन पर जमाअत ए इस्लामी हिंद ने जताया गहरा शोक

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 30-06-2026
Jamaat-e-Islami Hind has expressed deep grief over the demise of Maulana Syed Salman Husaini Nadwi.
Jamaat-e-Islami Hind has expressed deep grief over the demise of Maulana Syed Salman Husaini Nadwi.

 

नई दिल्ली।

जमाअत ए इस्लामी हिंद के अध्यक्ष Syed Sadatullah Husaini सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने प्रख्यात इस्लामी विद्वान, लेखक, शिक्षाविद और चिंतक Syed Salman Hussaini Nadwi मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी (रह.) के निधन पर गहरा दुख और शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि मौलाना का इंतकाल न केवल उनके परिवार और विद्यार्थियों के लिए, बल्कि पूरी मुस्लिम उम्मत और इस्लामी जगत के शैक्षणिक एवं बौद्धिक हलकों के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

मीडिया को जारी अपने शोक संदेश में सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा कि मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी (रह.) के इंतकाल की खबर ने गहरा दुख पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि मौलाना अपने दौर के सबसे प्रतिष्ठित इस्लामी विद्वानों, ख्यातिप्राप्त लेखकों, शिक्षाविदों और विचारकों में शामिल थे।

उन्होंने कहा कि मौलाना ने अपना पूरा जीवन शिक्षा, शोध, दावत, बौद्धिक मार्गदर्शन तथा शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और विकास के माध्यम से इस्लाम की सेवा में समर्पित कर दिया। कुरआन, हदीस, सीरत और इस्लामी फिक्ह के विद्वान के रूप में उन्होंने भारत और विदेशों में हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की और उनका मार्गदर्शन किया।

सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा कि मौलाना की पुस्तकें, लेख, व्याख्यान और अन्य विद्वत्तापूर्ण योगदान एक बहुमूल्य बौद्धिक विरासत हैं, जिनसे आने वाली पीढ़ियां भी लाभान्वित होती रहेंगी।

उन्होंने कहा कि Darul Uloom Nadwatul Ulama दारुल उलूम नदवतुल उलेमा और जामिया सैयद अहमद शहीद के साथ उनका लंबा जुड़ाव, जमीयत शबाबुल इस्लाम का नेतृत्व तथा अनेक शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थानों की स्थापना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को हमेशा याद रखा जाएगा।

जमाअत ए इस्लामी हिंद के अध्यक्ष ने कहा कि मौलाना ने इस्लामी शिक्षा, चरित्र निर्माण और समाज सेवा को बढ़ावा देने के लिए अथक प्रयास किए। उन्होंने इस्लामी ज्ञान की गहरी समझ को आधुनिक समय की आवश्यकताओं और चुनौतियों के साथ जोड़ते हुए भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्लामी चिंतन को नई दिशा प्रदान की।

उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी विद्वान त्रुटियों या मतभेदों से पूरी तरह मुक्त नहीं होता। कुछ मुद्दों पर मौलाना सलमान नदवी साहब के विचारों, बयानों या दृष्टिकोण से मतभेद हो सकते हैं, लेकिन ऐसे मतभेद इस्लाम और मुस्लिम समाज के लिए उनकी व्यापक और बहुआयामी सेवाओं के महत्व को कम नहीं कर सकते।

अपने संदेश के अंत में सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने जमाअत ए इस्लामी हिंद की ओर से मौलाना के परिवार, विद्यार्थियों, सहयोगियों, चाहने वालों और पूरी मुस्लिम उम्मत के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जमाअत ए इस्लामी हिंद इस दुख की घड़ी में शोक संतप्त परिवार के साथ खड़ी है।

उन्होंने अल्लाह से दुआ की कि वह मरहूम की कमियों को माफ फरमाए, उनकी आजीवन इस्लामी सेवाओं को सदक़ा ए जारिया के रूप में स्वीकार करे, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में उच्च स्थान प्रदान करे और मुस्लिम उम्मत को ऐसे नेक, योग्य और सक्षम विद्वान प्रदान करता रहे, जो दीन की इस महान सेवा को आगे बढ़ाते रहें।