जहांगीरपुरी बुलडोजर केसः अरशद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप का किया स्वागत, आज होगी सुनवाई

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] • 9 Months ago
जहांगीरपुरी बुलडोजर केसः अरशद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप का किया स्वागत, आज होगी सुनवाई
आवाज द वॉयस /नई दिल्ली
 
भारत के सर्वोच्च न्यायालय के दिल्ली के जहांगीरपुरी में मुस्लिम संपत्ति पर चलने वाले बुलडोजर पर तत्काल प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी करने का अरशद मदनी ने स्वागत किया है. इस मामले में आज भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है.

एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट के हस्ताक्षेप के बाद जहांगीरपुरी के प्रभावित क्षेत्र में गरीबों और मजदूरों को तत्काल राहत मिली है. भारत के प्रधान न्यायाधीश के समक्ष जमीयत उलेमा-ए-हिंद के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने प्रधान न्यायाधीश से कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना के संपत्ति पर बुलडोजर चलाया जा रहा है, जिसे रोका जाना चाहिए.
 
अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं की दलीलों से सहमति जताते हुए मुख्य न्यायाधीश ने तोड़फोड़ पर तत्काल रोक लगाने का आदेश जारी कर मामले की सुनवाई गुरुवार करने का फैसला किया.जमीयत उलेमा-ए-हिंद द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका डायरी संख्या 11955/2022 है, जिसपर कोर्ट ने सुनवाई की.आरोप है कि न्यायालय का आदेश आने के बाद भी डेढ़ घंटे तक दुकानें और मकान गिराए जाते रहे.
 
टीवी चौनलों पर खबर आ रही थी कि सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल विध्वंस अभियान रोक दिया है. इसलिए तोड़-फोड़ की कार्रवाई रोकी जाए, लेकिन दुर्भाग्य से उन्होंने विध्वंस अभियान जारी रखा. इसकी शिकायत भी आज सुप्रीम कोर्ट में की जाएगी.
 
मौलाना अरशद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट के तत्काल हस्तक्षेप का स्वागत करते हुए कहा कि हम अदालत के इस अंतरिम आदेश का स्वागत करते हैं. उम्मीद करते हैं कि अंतिम फैसला भी होगा. उन्होंने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने हमेशा देश में कानून-व्यवस्था स्थापित करने में किसी भी सरकार या अदालत के फैसले का स्वागत किया है और आगे भी करती रहेगी. वह अपनी परंपरा के अनुसार आवाज उठाना जारी रखेगी. 
 
उल्लेखनीय है कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद इस कार्रवाई को रोकने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली हुई है.
 
उनका आरोप है कि दिल्ली समेत विभिन्न राज्यों में अपराध की रोकथाम की आड़ में अल्पसंख्यकों खासकर मुसलमानों को तबाह करने के लिए बुलडोजर की खतरनाक राजनीति शुरू की गई है.
 
जमीयत उलेमा-ए-हिंद, जो भारतीय मुसलमानों के एक प्रतिनिधि निकाय है, ने इसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है. जमीयत उलेमा-ए-हिंद कानूनी सहायता समिति के सचिव गुलजार अहमद आजमी के माध्यम से यह याचिका दायर की गई है. एक याचिका वह राज्यों को आदेश जारी करने के लिए भी है कि अदालत की अनुमति के बिना किसी का घर या दुकान नहीं गिराया जाए.
 
गौरतलब है कि बुलडोजर की राजनीति की शुरुआत उत्तर प्रदेश से हुई है, लेकिन अब यह नापाक  गुजरात, मध्य प्रदेश, दिल्ली में भी शुरू हो गया है. गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारों के पदचिन्हों पर चलकर एक के बाद एक गुजरात में मुस्लिमों, दलितों और आदिवासियों की संपत्ति को अवैध रूप से नुकसान पहुंचाते हुए सुप्रीम कोर्ट को इन मामलों में दखल देने को कहा गया है.
 
याचिका में केंद्र सरकार के साथ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात राज्यों को पक्षकार बनाया गया है और हलफनामा दाखिल करने वाले गुलजार अहमद आजमी की याचिका में दिल्ली को भी शामिल किया गया है.
 
याचिका अधिवक्ता सरम नवीद ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से परामर्श के बाद तैयार की है, जबकि एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड कबीर दीक्षित ने इसे दायर किया है जिस पर आज सुनवाई होगी.