Indian Banks' Credit Growth May Slow to 12-13 in FY27: Report
नई दिल्ली
भारतीय बैंकिंग क्षेत्र आने वाले वर्षों में अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि के दौर में प्रवेश कर सकता है। वित्तीय सेवा संस्था Way2Wealthकी एक नई थीमैटिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 तक भारतीय बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ घटकर 12 से 13 प्रतिशत के बीच रह सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्ज की मांग में नरमी और तरलता (लिक्विडिटी) से जुड़ी चुनौतियां इस धीमेपन की मुख्य वजह होंगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकों के लिए जमा (डिपॉजिट) जुटाना अब पहले की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। हालांकि FY27 तक जमा वृद्धि भी 12-13 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना जताई गई है, लेकिन बचत खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट पर पारंपरिक निर्भरता लगातार कमजोर हो रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में वित्तीय बचत का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब लोग केवल बैंक एफडी में पैसा रखने के बजाय शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड जैसे विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं। देश में 18 करोड़ से अधिक डीमैट खाते और हर महीने 32,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के SIP निवेश इस बदलाव का संकेत हैं। रिपोर्ट के अनुसार, युवा और डिजिटल रूप से जागरूक पीढ़ी अब पारंपरिक बचत तरीकों की ओर लौटने वाली नहीं है।
बैंकिंग क्षेत्र के स्वास्थ्य को मापने वाले प्रमुख संकेतक क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) रेशियो में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। वर्तमान में यह अनुपात लगभग 82 प्रतिशत है, जो मार्च 2027 तक घटकर 79-80 प्रतिशत तक आने का अनुमान है। रिपोर्ट ने इसे किसी बड़े संकट के बजाय “धीरे-धीरे सामान्य होने वाली स्थिति” बताया है।
हालांकि, रिपोर्ट में कई संभावित जोखिमों को लेकर भी चेतावनी दी गई है। यदि बैंकिंग प्रणाली का CD रेशियो 85 प्रतिशत से ऊपर जाता है, तो Reserve Bank of India हस्तक्षेप कर सकता है या अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी कर सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बैंकों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है। नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM), यानी कर्ज पर कमाई और जमा पर खर्च के बीच का अंतर, FY26 में 10 से 15 बेसिस पॉइंट तक घट सकता है। हालांकि FY27 में कुछ सुधार की उम्मीद जताई गई है, खासकर तब जब जमा दरें धीरे-धीरे कम होंगी और महंगाई के कारण ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी होगी।
CASA (करंट अकाउंट सेविंग अकाउंट) अनुपात, जिसे बैंकों के सस्ते फंड का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है, 35 से 38 प्रतिशत के बीच कमजोर बना रह सकता है। इसका कारण यह है कि लोग अब अपनी बचत को विभिन्न निवेश विकल्पों में बांट रहे हैं।
रिपोर्ट का सबसे बड़ा निष्कर्ष यह है कि भारतीय बैंकों को अब सिर्फ पारंपरिक बचत पर निर्भर रहने के बजाय ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नई रणनीतियां अपनानी होंगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि “सस्ते और प्रचुर CASA फंड का दौर अब खत्म हो चुका है। अब जमा रणनीति ही बैंकों की प्रतिस्पर्धात्मक ताकत बनेगी।”
विशेषज्ञों ने छोटे वित्त बैंकों (SFBs) के लिए भी चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊंचे CD रेशियो और माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में बढ़ते एनपीए इन बैंकों के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। साथ ही, यदि सरकार छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें बढ़ाती है, तो खुदरा जमा के लिए प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि बैंक ग्राहकों को लंबे समय तक जोड़कर रखने के लिए नए उत्पाद विकसित करें, जैसे SIP जैसे आवर्ती जमा (Recurring Deposit) और सैलरी आधारित योजनाएं। इससे बैंकों को स्थिर जमा आधार बनाए रखने और कर्ज देने की क्षमता मजबूत करने में मदद मिलेगी।