एक सजदा न करने पर इब्लीस पर कयामत तक लानत, हम दिन में कितने सजदे छोड़ देते हैं?

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 07-11-2026
Iblis was cursed until the Day of Judgment for failing to perform a single prostration; how many prostrations do we ourselves forgo in a single day?
Iblis was cursed until the Day of Judgment for failing to perform a single prostration; how many prostrations do we ourselves forgo in a single day?

 

आगरा।

मस्जिद नहर वाली के खतीब मोहम्मद इकबाल ने जुमे के खुतबे में नमाज की अहमियत और सजदे की फजीलत पर रोशनी डालते हुए मुसलमानों को आत्ममंथन करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि अल्लाह के हुक्म के सामने तकब्बुर और नाफरमानी का रवैया अपनाने के कारण इब्लीस पर कयामत तक लानत की गई। यह वाकया इंसान के लिए बड़ी सीख और इबरत का पैगाम है।

खतीब मोहम्मद इकबाल ने कहा कि कुरआन में हजरत आदम अलैहिस्सलाम को सजदा करने के अल्लाह के हुक्म का जिक्र मिलता है। तमाम फरिश्तों ने अल्लाह के आदेश का पालन किया, लेकिन इब्लीस ने तकब्बुर की वजह से सजदा करने से इनकार कर दिया। उसने खुद को दूसरों से बेहतर समझा और अल्लाह के हुक्म की नाफरमानी की। इसका अंजाम उस पर लानत और अज़ाब के रूप में सामने आया।

उन्होंने नमाजियों से सवाल किया कि जब एक सजदा करने से इनकार करने पर इब्लीस इस अंजाम तक पहुंचा, तो हमें भी सोचना चाहिए कि हम दिनभर में कितनी बार अल्लाह के हुक्म से गफलत बरतते हैं? पांच वक्त की फर्ज नमाजों में कुल 34 रकअत और 34 फर्ज सजदे अदा किए जाते हैं। जो व्यक्ति फर्ज नमाज छोड़ता है, वह अल्लाह की इबादत के एक अहम फर्ज से खुद को महरूम कर लेता है।

उन्होंने हदीस-ए-नबवी का हवाला देते हुए कहा कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया है कि इंसान और शिर्क व कुफ्र के बीच फर्क नमाज छोड़ने का है। (सहीह मुस्लिम: 82)

खतीब ने कहा कि क्या हमारे पास 24 घंटे में इतना भी वक्त नहीं है कि हम पांच वक्त की फर्ज नमाज अदा कर सकें? दुनिया के तमाम कामों के लिए हम वक्त निकाल लेते हैं, लेकिन अपने खालिक के सामने सजदा करने में लापरवाही बरतते हैं। यह हम सभी के लिए सोचने का विषय है।

तकब्बुर के बारे में एक अन्य हदीस का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया है कि जिस व्यक्ति के दिल में राई के दाने के बराबर भी घमंड होगा, वह जन्नत में दाखिल नहीं होगा। (सहीह मुस्लिम: 91)

उन्होंने कहा कि हर इंसान को अपने विचारों और कर्मों का जायजा लेना चाहिए। कहीं ऐसा तो नहीं कि दुनिया की व्यस्तताएं, खुदपसंदी और शैतान के वसवसे हमें नमाज से दूर कर रहे हैं? हमें शैतान का साथी बनने के बजाय अल्लाह का फरमाबरदार बंदा बनने की कोशिश करनी चाहिए।

खुतबे के आखिर में मोहम्मद इकबाल ने तमाम मुसलमानों से पांच वक्त की नमाज की पाबंदी करने, तकब्बुर से बचने और अल्लाह के सामने पूरी आजिजी के साथ सजदा करने की अपील की।

उन्होंने दुआ की कि अल्लाह तआला हम सभी को पांच वक्त की नमाज पाबंदी के साथ अदा करने, हर सजदा करने की तौफीक देने और तकब्बुर व नाफरमानी से महफूज रखने की तौफीक अता फरमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।