High Court quashes criminal defamation case against senior advocate Pinaki Mishra
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
दिल्ली उच्च न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व सांसद पिनाकी मिश्रा के खिलाफ आपराधिक मानहानि की कार्यवाही को रद्द कर दिया है। मिश्रा पर आरोप था कि उन्होंने साक्षात्कार में एक वकील के बारे में कथित तौर पर कुछ आपत्तिजनक शब्द कहे थे।
उच्च न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा अप्रैल 2019 में मिश्रा को मानहानि के मामले में मुकदमे का सामना करने के लिए तलब करने के आदेश को भी रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि कार्यवाही जारी रखने की इजाजत देने से न्याय के मकसद को कोई फायदा नहीं होगा।
न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि शिकायतकर्ता ने खुद को एकमात्र गवाह के रूप में पेश किया और ऐसा कोई साक्ष्य या सामग्री उपलब्ध नहीं कराई, जिससे प्रथमदृष्टया यह साबित हो सके कि कथित टिप्पणी से दूसरों की नजर में उनकी प्रतिष्ठा कम हुई।
अदालत ने 25 अगस्त के आदेश में कहा, ‘‘रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य या सामग्री नहीं है, चाहे वह किसी अन्य व्यक्ति के बयान के रूप में हो या किसी अन्य रूप में, जिससे प्रथमदृष्टया यह साबित हो सके कि कथित टिप्पणी का प्रभाव प्रतिवादी संख्या-2 (शिकायतकर्ता) की प्रतिष्ठा को दूसरों की नजर में कम करने वाला था।’’
उच्च न्यायालय ने कहा कि आपराधिक कार्यवाही को जारी रखने की अनुमति देना न्याय के उद्देश्य को आगे नहीं बढ़ाएगा। इसके बजाय, पर्याप्त बुनियादी साक्ष्य के अभाव में याचिकाकर्ता (मिश्रा) को आपराधिक मुकदमे की कठिन प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।