सरकार 27 अप्रैल को स्टील आयात से जुड़े मुद्दों पर 'ओपन हाउस' आयोजित करेगी

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 22-04-2026
Govt to hold Open House on Steel Import Issues on April 27
Govt to hold Open House on Steel Import Issues on April 27

 

नई दिल्ली
 
मंत्रालय की एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, इस्पात मंत्रालय 27 अप्रैल को इस्पात आयात से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक 'ओपन हाउस' आयोजित करेगा, जिसमें SIMS और QCO छूट से जुड़ी चिंताओं पर भी बात होगी। मंत्रालय ने बताया कि यह सत्र नई दिल्ली के नेताजी नगर स्थित GPOA-3 की तीसरी मंज़िल पर 'स्टील रूम' में आयोजित किया जाएगा। इस सत्र में विभिन्न कंपनियों और उद्योग संघों को आमंत्रित किया गया है, ताकि वे इस्पात आयात से संबंधित अपनी चिंताओं को सामने रख सकें।
 
बैठक के लिए एक निश्चित समय स्लॉट (time slot) प्राप्त करने हेतु प्रतिभागियों को tech-steel[at]nic[dot]in पर एक ईमेल भेजना होगा। इसके लिए अनुरोध 24 अप्रैल को दोपहर 3:00 बजे तक जमा किए जाने चाहिए। यह 'ओपन हाउस' सुबह 11:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक चलेगा, और प्रतिभागियों को उनके विशिष्ट समय स्लॉट की जानकारी ईमेल के माध्यम से दी जाएगी। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस सत्र में बिना पूर्व सूचना के (walk-in) शामिल होने की अनुमति नहीं होगी, और प्रत्येक संगठन से केवल एक प्रतिनिधि को ही भाग लेने की अनुमति दी जाएगी।
 
विज्ञप्ति के अनुसार, प्रतिभागियों को अपनी कंपनी या संघ का नाम, उद्योग और उत्पाद का प्रकार, तथा यह जानकारी देनी होगी कि उनका मुद्दा SIMS, SARAL SIMS या QCO छूट में से किससे संबंधित है। इसके साथ ही, उन्हें अपने मुद्दे का संक्षिप्त विवरण, यदि कोई आवेदन पहले दायर किया गया है तो उसका संदर्भ, और अपनी संपर्क जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी।
 
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब भारतीय इस्पात उद्योग ने वित्त वर्ष 2025-26 में ज़बरदस्त प्रदर्शन किया है। 8 अप्रैल को जारी अपनी विज्ञप्ति में मंत्रालय ने बताया कि वैश्विक अनिश्चितताओं और कीमतों के दबाव के बावजूद, भारत ने दुनिया के दूसरे सबसे बड़े इस्पात उत्पादक के रूप में अपनी स्थिति को बरकरार रखा है।
 
मंत्रालय ने बताया कि अप्रैल से मार्च की अवधि के दौरान, भारत के कच्चे इस्पात (crude steel) का उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में 10.7 प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग 168.4 मिलियन टन तक पहुँच गया। इस वृद्धि में मज़बूत घरेलू मांग और बुनियादी ढाँचे से जुड़ी गतिविधियों का अहम योगदान रहा। इसी तरह, तैयार इस्पात (finished steel) की खपत भी बढ़कर लगभग 164 मिलियन टन तक पहुँच गई, जिसे बुनियादी ढाँचे, निर्माण, रेलवे और विनिर्माण क्षेत्रों में बढ़ी हुई गतिविधियों से गति मिली।
 
तैयार इस्पात के निर्यात में 35.9 प्रतिशत की ज़बरदस्त वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह आँकड़ा 6 मिलियन टन से भी अधिक हो गया; वहीं दूसरी ओर, इस्पात के आयात में 31.7 प्रतिशत की गिरावट आई। इन दोनों घटनाक्रमों के परिणामस्वरूप, भारत एक बार फिर 'शुद्ध निर्यातक' (net exporter) के रूप में अपनी स्थिति को पुनः प्राप्त करने में सफल रहा। इसके साथ ही, इस क्षेत्र को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिनमें कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण मार्जिन पर दबाव, लॉजिस्टिक्स खर्चों में बढ़ोतरी और वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव शामिल हैं। गैस आपूर्ति में रुकावटों और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने भी आपूर्ति श्रृंखला में मौजूद कमजोरियों को उजागर किया।