आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमार ने बुधवार को कहा कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के समर्थन से भारत के बंदरगाह माल ढुलाई के प्रवेश द्वार से एकीकृत लॉजिस्टिक एवं औद्योगिक केंद्रों में परिवर्तित हो रहे हैं।
‘सिंगापुर मैरीटाइम वीक’ (एसएमडब्ल्यू) 2026 के दौरान आयोजित गोलमेज बैठक में करीब 200 निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कुमार ने कहा, ‘‘ भारत स्थिर और निर्णायक तरीके से उस दिशा में आगे बढ़ रहा है जिससे वह सतत विकास, निवेश आकर्षित करने व वैश्विक मूल्य शृंखला में एकीकृत होने की सर्वोत्तम स्थिति में आ सके।’’
उन्होंने भारतीय बंदरगाहों की वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी क्षमता दोगुनी हो चुकी है और अगला लक्ष्य विश्वस्तरीय दक्षता हासिल करना है।
वित्त वर्ष 2013-14 के बाद से माल ढुलाई क्षमता 1,40 करोड़ टन प्रति वर्ष से बढ़कर 2,77.1 करोड़ टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) हो गई है। 2030 तक इसे 3,50 करोड़ टन प्रति वर्ष और 2047 तक 1000 करोड़ टन प्रति वर्ष तक पहुंचाने का लक्ष्य है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के प्रमुख बंदरगाहों ने 91.5 करोड़ टन से अधिक माल ढुलाई की जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है और इसमें सालाना सात प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई।
कुमार ने कहा कि 437 जहाजों की मांग है और लगभग 2.2 लाख करोड़ रुपये की 15 वर्षीय सरकारी योजना के तहत तेल-गैस सार्वजनिक उपक्रमों, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के बेड़े, ग्रीन टग और ड्रेजर की जरूरतों को पूरा किया जाएगा।
कुमार ने कहा, ‘‘ 34 जहाजों के लिए पहले ही निविदाएं जारी की जा चुकी हैं जिनमें से सभी में भारतीय जहाज विनिर्माण कंपनियों की मजबूत भागीदारी देखी जा रही है।’’
उन्होंने साथ ही 69,725 करोड़ रुपये के समुद्री पुनरुद्धार पैकेज की जानकारी देते हुए कहा कि शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम (एसबीएफएएस) के तहत 24,736 करोड़ रुपये का कोष मार्च 2036 तक उपलब्ध रहेगा। ‘मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड’ के तहत 25,000 करोड़ रुपये दीर्घकालिक और कम लागत वाले वित्तपोषण के लिए उपलब्ध हैं जिसमें तीन प्रतिशत ब्याज सब्सिडी भी शामिल है।
कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम (सीएमपीएस) के तहत 13 वर्ष में 10,350 करोड़ रुपये के निवेश से सालाना 7.5 लाख टीईयू कंटेनर उत्पादन का लक्ष्य है जो वर्तमान 24,000 टीईयू से काफी अधिक है।