आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
कांग्रेस ने शुक्रवार को एक खबर का हवाला देते हुए दावा किया कि मोदी सरकार अब चीनी कंपनियों पर लगे पांच साल पुराने प्रतिबंधों को हटाने का प्रस्ताव रख रही है, ताकि वे भारतीय सरकारी ठेकों के लिए बोली लगा सकें।
विपक्षी दल ने यह भी दावा किया कि यह कदम चीनी आक्रामकता के सामने एक ‘‘सोची-समझी आत्मसमर्पण नीति’’ से कम नहीं है।
कांग्रेस ने यह भी मांग की कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संसद के आगामी बजट सत्र के दौरान चीन नीति पर अपनी सरकार के अचानक लिए गए इस ‘‘यू-टर्न’’ के बारे में स्पष्टीकरण दें।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक खबर साझा की, जिसमें दावा किया गया है कि भारत का वित्त मंत्रालय सरकारी ठेकों के लिए बोली लगाने वाली चीनी कंपनियों पर पांच साल पुराने प्रतिबंधों को समाप्त करने की योजना बना रहा है।
इन दावों पर सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
रमेश ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन द्वारा पाकिस्तान को पूर्ण सैन्य समर्थन (और खुले तौर पर मोर्चा संभालने) देने के आठ महीने बाद और जब सेना के उपप्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह चीन को भारत के “दुश्मनों” में से एक बता चुके हैं- अब मोदी सरकार चीनी कंपनियों पर लगे पांच साल पुराने प्रतिबंधों को हटाने का प्रस्ताव रख रही है, ताकि वे भारतीय सरकारी ठेकों के लिए बोली लगा सकें।’’