आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
कांग्रेस ने मंगलवार को आरोप लगाया कि मोदी सरकार सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों की ‘‘बाजीगरी’’ के जरिये देश की आर्थिक स्थिति की ‘‘बदहाल हकीकत’’ छिपा रही है।
मुख्य विपक्षी दल ने यह सवाल भी किया किया कि अगर अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन कर रही है तो परिवारों को खर्च के लिए कर्ज लेने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि सरकार ने जीडीपी की गणना की पद्धति में बार-बार बदलाव कर आंकड़ों को अपने हिसाब से ‘‘सेट’’ किया है।
रमेश ने कहा कि ‘नॉमिनल’ और ‘रियल जीडीपी’ के बीच का अंतर महंगाई को दर्शाता है और सरकार के मुताबिक यह अंतर केवल 2.3 प्रतिशत है, जबकि इसी तिमाही में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई नौ प्रतिशत से अधिक रही है। उन्होंने इसे ‘‘स्पष्ट विसंगति’’ करार दिया।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि यह विसंगति केंद्र सरकार की ओर से जीडीपी गणना की पद्धति में किए गए बदलावों का नतीजा है।
उन्होंने दावा किया कि सरकार ने इस वर्ष जीडीपी की गणना की पद्धति में दो बार बदलाव किया और जून में नवीनतम जीडीपी अनुमानों के दौर से ठीक पहले इसकी गणना में डब्ल्यूपीआई के इस्तेमाल से दूरी बना ली।
रमेश ने कहा कि अगर सरकार ‘‘ईमानदार आंकड़े’’ पेश करती तो वास्तविक आर्थिक वृद्धि दर काफी कम होती। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे पर पहले भी कई लोग सवाल उठा चुके हैं, जिनमें मोदी सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार भी शामिल हैं।
कांग्रेस महासचिव ने ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसके 10 वर्ष पूरे होने के बावजूद सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी 13 प्रतिशत से नीचे है। उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ को तंज कसते हुए ‘‘फेक इन इंडिया’’ बताया।
पार्टी नेता सलमान सोज ने संवाददाताओं से कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘‘जमीनी हकीकत से बहुत दूर हैं’’।
सोज ने महंगाई का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि खुदरा महंगाई 3.9 प्रतिशत और थोक महंगाई करीब 10 प्रतिशत है तथा सरकार थोक महंगाई के आंकड़े को कम दिखा रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘‘वोकल फॉर लोकल’’ के आह्वान के बावजूद चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 112 अरब डॉलर का है।
सोज ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के नारे का जिक्र करते हुए दावा किया कि 2018 के बाद से देश में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की क्षमता में ‘‘एक बूंद’’ की भी बढ़ोतरी नहीं हुई है।