आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
बहुपक्षवाद की राह में मुश्किल भू-राजनीतिक प्रतिकूलताएं होने के बावजूद वैश्विक सहयोग में मजबूती बनी हुई है। हालांकि यह अभी भी आर्थिक, सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी प्रमुख चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक स्तर से नीचे है। विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की एक अध्ययन रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
मैकिंजी एंड कंपनी के सहयोग से तैयार इस अध्ययन रिपोर्ट के तीसरे संस्करण में व्यापार और पूंजी, नवाचार और प्रौद्योगिकी, जलवायु और प्राकृतिक पूंजी, स्वास्थ्य और कल्याण तथा शांति और सुरक्षा जैसे पांच स्तंभों के तहत 41 संकेतकों के आधार पर वैश्विक सहयोग का आकलन किया गया है।
‘वैश्विक सहयोग बैरोमीटर 2026’ रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के वर्षों में वैश्विक सहयोग का समग्र स्तर लगभग स्थिर रहा है, हालांकि इसके स्वरूप में बदलाव होता हुआ दिखाई दे रहा है।
अध्ययन रिपोर्ट कहती है कि बहुपक्षीय सहयोग मंचों के कमजोर पड़ने के बीच क्षेत्रीय और छोटे स्तर के नवोन्मेषी सहयोग उभर रहे हैं। जलवायु, प्रकृति तथा नवाचार और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग में अपेक्षाकृत अधिक बढ़ोतरी देखी गई है, खासकर वहां जहां यह राष्ट्रीय हितों के अनुरूप रहा।
वहीं, स्वास्थ्य और कल्याण तथा व्यापार और पूंजी से जुड़े क्षेत्रों में स्थिति लगभग स्थिर बनी रही, जबकि शांति और सुरक्षा के क्षेत्र में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई।
डब्ल्यूईएफ के अध्यक्ष और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) बोर्गे ब्रेंडे ने कहा, "दशकों के सबसे अस्थिर और अनिश्चित दौर के बीच भी सहयोग ने मजबूती दिखाई है। हालांकि, शांति और सुरक्षा से जुड़े सभी संकेतक कोविड-19 महामारी से पहले के स्तर से नीचे चले गए हैं।"
उन्होंने कहा कि संघर्षों में बढ़ोतरी, सैन्य खर्च में इजाफा और बहुपक्षीय समाधान तंत्रों की सीमित प्रभावशीलता के कारण 2024 के अंत तक दुनिया भर में जबरन विस्थापित लोगों की संख्या रिकॉर्ड 12.3 करोड़ तक पहुंच गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, दबावों के चलते क्षेत्रीय शांति प्रयासों और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर बन रहे हैं। मसलन, अमेरिका का ऑस्ट्रेलिया, कनाडा एवं जापान के साथ महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग और भारत, खाड़ी देशों, जापान और यूरोप के बीच कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़ा सहयोग बढ़ रहा है।
डब्ल्यूईएफ ने कहा कि कम-कार्बन वाली वस्तुओं के व्यापार ने वैश्विक सहयोग को भी गति दी है। वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के कारण लागत कम हुई और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में इनका तेजी से उपयोग संभव हो सका।