यह गरिमामय सम्मान समारोह क्रिएटिव फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी के दौरान नई दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट के निकट स्थित एच.के.एस. सुरजीत हॉल में संपन्न हुआ। यह संगोष्ठी भारत की दो महान समाज सुधारकों और महिला शिक्षा की अग्रदूतों सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख की जयंती के अवसर पर आयोजित की गई थी। कार्यक्रम का उद्देश्य महिला शिक्षा की ऐतिहासिक विरासत, संवैधानिक अधिकारों और समकालीन सामाजिक चुनौतियों पर गंभीर विमर्श को आगे बढ़ाना था।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू ने अपने संबोधन में शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन और संवैधानिक सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि जब तक महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बौद्धिक स्वतंत्रता नहीं मिलेगी, तब तक वास्तविक समानता संभव नहीं है। न्यायमूर्ति काटजू ने यह भी रेखांकित किया कि सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख के संघर्ष, साहस और योगदान आज के सामाजिक परिदृश्य में भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने अपने समय में थे।
संगोष्ठी में वक्ताओं ने भारत में महिला शिक्षा के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख द्वारा शुरू किए गए अग्रणी शैक्षिक आंदोलन को याद किया। उन्होंने कहा कि इन दोनों समाज सुधारकों के प्रयासों ने न केवल महिलाओं की शिक्षा की नींव रखी, बल्कि व्यापक सामाजिक परिवर्तन का मार्ग भी प्रशस्त किया। उस दौर में जब महिलाओं, विशेषकर वंचित वर्गों की शिक्षा को सामाजिक रूप से स्वीकार नहीं किया जाता था, तब इन दोनों ने साहसिक पहल कर समाज को नई दिशा दी।
इस अवसर पर अपने विचार साझा करते हुए डॉ. नजिश बेगम ने फातिमा शेख की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि फातिमा शेख ने सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर अपने ही घर में एक विद्यालय की स्थापना की थी, जो भारत में बालिकाओं की शिक्षा के इतिहास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ। डॉ. बेगम ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब भी सावित्रीबाई फुले की विरासत को याद किया जाए, तब फातिमा शेख के योगदान को समान रूप से सम्मान और मान्यता मिलनी चाहिए। दोनों ने मिलकर महिला शिक्षा की एक मजबूत, टिकाऊ और प्रेरणादायक नींव रखी, जिसका प्रभाव आज भी समाज में दिखाई देता है।
डॉ. नजिश बेगम को मिला यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत शैक्षिक और सामाजिक प्रयासों की सराहना है, बल्कि यह महिला शिक्षा और लैंगिक न्याय के क्षेत्र में कार्यरत शिक्षाविदों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। उनका कार्य इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा के माध्यम से सामाजिक चेतना, समानता और न्याय को सशक्त रूप से आगे बढ़ाया जा सकता है।यह सम्मान समारोह महिला शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करने तथा समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में निरंतर प्रयास करने का एक सार्थक संदेश लेकर आया।






.png)