अर्सला खान/नई दिल्ली
बॉलीवुड में अगर भव्य गानों, एनर्जी से भरे डांस स्टेप्स और एंटरटेनमेंट से भरपूर फिल्मों की बात हो, तो फ़राह ख़ान का नाम अपने आप सामने आ जाता है। कोरियोग्राफर के तौर पर शुरुआत करने वाली फ़राह आज एक सफल निर्देशक, टीवी पर्सनैलिटी, उद्यमी और तीन बच्चों की मां हैं। उनके जन्मदिन के मौके पर उनका सफ़र इसलिए खास लगता है क्योंकि यह बिल्कुल ज़मीनी है संघर्षों से निकला, मेहनत से सजा और आत्मविश्वास से भरा हुआ।
शुरुआती ज़िंदगी और संघर्ष
फ़राह ख़ान का जन्म 9 जनवरी 1965 को मुंबई में हुआ। उनके पिता कमरान ख़ान फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े थे, लेकिन उनके असमय निधन के बाद परिवार पर मुश्किलों का पहाड़ टूट पड़ा। घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी। ऐसे समय में फ़राह ने हार मानने के बजाय अपने भीतर की ताक़त को पहचाना। उन्होंने कभी किसी डांस स्कूल से ट्रेनिंग नहीं ली, बल्कि फ़िल्में देखकर, कलाकारों को देखकर और खुद प्रैक्टिस करके नृत्य सीखा। यही उनकी सबसे बड़ी पहचान बनी—सीखने की ज़िद और आगे बढ़ने का जज़्बा।
कोरियोग्राफ़ी से मिली पहचान
फ़राह ख़ान ने बतौर कोरियोग्राफ़र बॉलीवुड में जो मुकाम बनाया, वह किसी सपने से कम नहीं है। “छैंया छैंया” जैसे गाने ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया। इसके बाद “एक पल का जीना”, “डोले रे डोले”, “शीला की जवानी” और “डार्डी डिस्को” जैसे गानों ने उनकी क्रिएटिविटी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके डांस स्टेप्स आसान होते हैं, लेकिन उनमें दम और स्टाइल भरपूर होता है। यही वजह है कि आम लोग भी उनके गानों से जुड़ जाते हैं। फ़राह को कई बार बेस्ट कोरियोग्राफ़र के अवॉर्ड भी मिल चुके हैं।
डायरेक्शन में रखा मज़बूत कदम
कोरियोग्राफी में सफलता के बाद फ़राह ने निर्देशन की दुनिया में कदम रखा। उनकी पहली फिल्म “मैं हूं ना” ने यह साबित कर दिया कि वे सिर्फ़ डांस तक सीमित नहीं हैं। इसके बाद “ओम शांति ओम” ने उन्हें टॉप डायरेक्टर्स की लिस्ट में ला खड़ा किया। इस फिल्म ने न सिर्फ़ बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड बनाए, बल्कि बॉलीवुड को एक यादगार फिल्म भी दी। “हैप्पी न्यू ईयर” जैसी फिल्में बताती हैं कि फ़राह एंटरटेनमेंट को कितनी अच्छी तरह समझती हैं। उनकी फिल्मों में ग्लैमर, इमोशन और ह्यूमर का अच्छा बैलेंस देखने को मिलता है।
टीवी और सोशल मीडिया पर अलग अंदाज़
फ़राह ख़ान टीवी पर भी एक जाना-पहचाना चेहरा हैं। डांस रियलिटी शोज़ में जज के तौर पर उनका अंदाज़ सीधा, मज़ेदार और कभी-कभी सख़्त भी होता है। लोग उन्हें इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि वे बनावटी नहीं लगतीं। सोशल मीडिया पर भी वे काफ़ी एक्टिव हैं और अपने रोज़मर्रा के पलों, दोस्तों और परिवार के साथ की झलकियां शेयर करती रहती हैं।
तीन बच्चों की मां और ज़िंदगी का दूसरा पहलू
फ़राह ख़ान सिर्फ़ एक सफल फिल्ममेकर नहीं, बल्कि तीन बच्चों की मां भी हैं। वे अक्सर मातृत्व, बच्चों की परवरिश और काम के बीच संतुलन पर खुलकर बात करती हैं। उनका मानना है कि महिलाएं अगर चाहें तो परिवार और करियर दोनों को अच्छे से संभाल सकती हैं। वे अपनी ज़िंदगी के अनुभवों को बिना झिझक साझा करती हैं, जिससे कई महिलाएं उनसे जुड़ाव महसूस करती हैं।
क्लाउड किचन और नई शुरुआत
फ़राह ख़ान ने हाल के सालों में एक और नया कदम उठाया—क्लाउड किचन की शुरुआत। यह दिखाता है कि वे सिर्फ़ फिल्म इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। बिज़नेस की दुनिया में कदम रखकर उन्होंने साबित किया कि उम्र या पहचान कभी नई शुरुआत में रुकावट नहीं बनती। उनका यह कदम कई लोगों के लिए प्रेरणा है कि कुछ अलग करने का हौसला हमेशा ज़िंदा रहना चाहिए।
जन्मदिन पर एक प्रेरणा
अपने जन्मदिन पर फ़राह ख़ान की कहानी हमें यही सिखाती है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इंसान अपने हुनर पर भरोसा रखे और मेहनत करता रहे, तो रास्ता ज़रूर निकलता है। डांस फ्लोर से लेकर डायरेक्टर की कुर्सी तक, बच्चों की मां बनने से लेकर बिज़नेस शुरू करने तक—फ़राह ख़ान का सफ़र आज की पीढ़ी के लिए एक सच्ची और प्रेरक मिसाल है।