बंदूक से राखी तक : छत्तीसगढ़ के पुनर्वास केंद्र में पूर्व माओवादी सीख रहे हुनर

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 27-08-2026
From guns to Rakhi: Former Maoists learn skills at a Chhattisgarh rehabilitation centre
From guns to Rakhi: Former Maoists learn skills at a Chhattisgarh rehabilitation centre

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
 छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में आत्मसमर्णण करने वाले माओवादियों की उंगलियां अब बंदूक के ट्रिगर पर नहीं बल्कि रेशम की डोर और मोतियों पर हैं जिससे वह सुंदर राखियां तैयार कर रहे हैं।

कांकेर जिले के चौगेल (मुल्ला) गांव में एक सुरक्षा शिविर के भीतर बने पुनर्वास केंद्र में, पूर्व नक्सलियों ने त्योहार से पहले एक हजार से अधिक राखियां तैयार कर ली हैं, जो शुक्रवार को भाइयों की कलाइयों पर सजेंगी।
 
कांकेर जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित यह केंद्र एक ऐसी जगह बन गया है जहां पूर्व माओवादी सदस्य ऐसे हुनर सीख रहे हैं जो हिंसा का रास्ता छोड़ने के बाद उन्हें रोजी-रोटी कमाने में मदद कर सकते हैं।
 
अधिकारियों ने बताया कि पुनर्वास केंद्र में रह रहे पुरुषों और महिलाओं ने मिलकर यह राखियां बनाई हैं और इन्हें बाजार में बेचा भी गया है, जिससे प्रशिक्षण लेने वालों को अपने काम से कमाई करने का मौका मिला है।
 
कांकेर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आकाश श्रीश्रीमाल ने कहा, ‘‘पुनर्वास केंद्र में रहने वाले पूर्व माओवादियों के लिए कई गतिविधियां चलाई जा रही हैं। इस साल होली के दौरान, उन्होंने गुलाल और रंग तैयार किए थे, और अब रक्षाबंधन के लिए उन्होंने एक हजार से अधिक राखियां बनाई हैं।’’