जेलर फिरोजा खातून–हिंदू कैदी धर्मेंद्र सिंह की जेल लव स्टोरी, सलाखों से शादी तक का सफर

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 08-05-2026
Firoza Khatoon and Dharmendra Singh: A Prison Love Story—The Journey from Behind Bars to Marriage
Firoza Khatoon and Dharmendra Singh: A Prison Love Story—The Journey from Behind Bars to Marriage

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली 

मध्य प्रदेश के सतना जिले की केंद्रीय जेल की सख्त दीवारों के भीतर जहां आमतौर पर अपराध, सजा और अनुशासन की कहानियाँ सुनाई देती हैं, वहीं इसी जेल से एक ऐसी प्रेम कहानी सामने आई है जिसने पूरे इलाके को हैरान कर दिया है। यह कहानी है सहायक जेल अधीक्षक फिरोजा खातून और आजीवन कारावास की सजा काट चुके पूर्व बंदी धर्मेंद्र सिंह उर्फ अभिलाष की, जिनकी मुलाकात जेल के भीतर हुई और वही मुलाकात आगे चलकर प्रेम और फिर विवाह में बदल गई। दोनों ने 5 मई को मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के लवकुशनगर में हिंदू रीति-रिवाजों और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ शादी कर ली। यह शादी अब सिर्फ एक व्यक्तिगत घटना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा, हैरानी और सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी एक ‘रियल लाइफ फिल्मी कहानी’ बन चुकी है।

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जेल की चारदीवारी में शुरू हुई कहानी, कागज़ों से दिल तक पहुँचा रिश्ता

इस अनोखी प्रेम कहानी की शुरुआत सतना केंद्रीय जेल से हुई, जहां रीवा की रहने वाली फिरोजा खातून सहायक जेल अधीक्षक और वारंट इंचार्ज के पद पर तैनात थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात बंदी धर्मेंद्र सिंह से हुई, जो एक गंभीर हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। धर्मेंद्र सिंह पर वर्ष 2007 में चंदला नगर परिषद के तत्कालीन उपाध्यक्ष कृष्ण दत्त दीक्षित की हत्या का आरोप था। जांच में यह भी सामने आया था कि हत्या के बाद शव को छिपाने के लिए दफना दिया गया था, जिससे यह मामला उस समय काफी सनसनीखेज बन गया था। इसी केस में उसे आजीवन कारावास की सजा हुई थी।

जेल में उसके अच्छे आचरण को देखते हुए उसे प्रशासनिक कामों में लगाया गया था, खासकर वारंट से जुड़े कागजी कार्यों में। यही वह मोड़ था जहां उसका फिरोजा खातून से नियमित संपर्क शुरू हुआ। पहले यह बातचीत पूरी तरह पेशेवर थी, लेकिन धीरे-धीरे इसमें अपनापन जुड़ता गया और फिर यह रिश्ता दोस्ती में बदल गया। समय बीतने के साथ यह दोस्ती एक गहरे भावनात्मक रिश्ते में बदल गई और दोनों को एक-दूसरे के प्रति भावनात्मक जुड़ाव महसूस होने लगा।

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जेल से रिहाई, लेकिन रिश्ता नहीं टूटा

धर्मेंद्र सिंह ने लगभग 14 साल जेल में बिताए और अच्छे आचरण के आधार पर करीब चार साल पहले रिहा कर दिया गया। लेकिन जेल से बाहर आने के बाद भी दोनों का संपर्क खत्म नहीं हुआ। यह रिश्ता समय के साथ और मजबूत होता गया। धीरे-धीरे दोनों ने यह तय कर लिया कि वे अपने रिश्ते को एक औपचारिक नाम देंगे और शादी करेंगे। हालांकि यह निर्णय उनके लिए आसान नहीं था क्योंकि उन्हें सामाजिक और पारिवारिक विरोध का सामना करना पड़ा।

परिवार का विरोध, फिर भी नहीं टूटी जिद

बताया जा रहा है कि फिरोजा खातून के परिवार ने इस रिश्ते का कड़ा विरोध किया और विवाह में शामिल होने से इनकार कर दिया। परिवार की अनुपस्थिति ने इस शादी को और भी भावनात्मक बना दिया, लेकिन दोनों अपने फैसले पर अडिग रहे।

अनोखी शादी: ‘कन्यादान’ निभाया VHP नेता ने

शादी का आयोजन 5 मई को छतरपुर जिले के लवकुशनगर में पूरी हिंदू रीति-रिवाजों के साथ किया गया। खास बात यह रही कि दुल्हन के परिवार के न आने पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के जिला उपाध्यक्ष राजबहादुर मिश्रा और उनकी पत्नी ने आगे आकर ‘कन्यादान’ की रस्म निभाई। इस विवाह में बजरंग दल के कार्यकर्ता भी मौजूद रहे और पूरे विधि-विधान के साथ वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच शादी संपन्न हुई।

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नाम बदलकर छुपाने की कोशिश और सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें

जानकारी के अनुसार, सामाजिक दबाव से बचने के लिए धर्मेंद्र सिंह ने विवाह कार्ड पर अपना नाम बदलकर इस्तेमाल किया। शादी के बाद दोनों की तस्वीरें सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप ग्रुप्स पर तेजी से वायरल हो गईं, जिसके बाद यह जोड़ा अचानक स्थानीय स्तर पर चर्चित चेहरा बन गया।

जेल में भी बनी चर्चा का विषय

सतना केंद्रीय जेल, जहां इस प्रेम कहानी की शुरुआत हुई थी, वहां भी यह शादी लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रही। जेल के कर्मचारी और कई पूर्व अधिकारी इस अनोखे रिश्ते को लेकर हैरान भी रहे और कुछ ने नवविवाहित जोड़े को शुभकामनाएँ भी दीं।

 

एक फिल्मी कहानी जैसी हकीकत

जो कहानी कभी जेल की फाइलों और कागज़ी कामों से शुरू हुई थी, वह आज समाज, रिश्तों और परंपराओं की सीमाओं को पार करते हुए एक वास्तविक प्रेम कहानी बन चुकी है। सामाजिक विरोध, पारिवारिक दूरी और अतीत की परछाइयों के बावजूद फिरोजा खातून और धर्मेंद्र सिंह ने एक-दूसरे का हाथ थामकर नई जिंदगी की शुरुआत कर दी है। यह कहानी आज लोगों के बीच इस बात का उदाहरण बन गई है कि प्यार कई बार सबसे असामान्य परिस्थितियों में भी जन्म ले सकता है—यहाँ तक कि जेल की दीवारों के भीतर भी।