आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
पिछले दो सप्ताह में मानसून की बारिश के कारण यमुना पर स्थित हथिनीकुंड बैराज में जलप्रवाह तो बढ़ा, लेकिन नदी में छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा कई दिनों तक नहीं बढ़ाई गई। इससे दिल्ली के निचले हिस्से में यमुना की पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है।
‘साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रीवर्स एंड पीपुल’ (एसएएनडीआरपी) की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि मानसून शुरू होने के बाद बैराज पर पानी की आवक लगातार बढ़ी, लेकिन अतिरिक्त पानी का अधिकांश हिस्सा पश्चिमी और पूर्वी यमुना नहरों में मोड़ दिया गया। नदी में केवल गर्मियों के दौरान छोड़े जाने वाले न्यूनतम स्तर का पानी ही छोड़ा जाता रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक से पांच जुलाई के बीच बैराज पर औसत दैनिक जलप्रवाह लगभग 192 क्यूमेक्स से बढ़कर करीब 242 क्यूमेक्स हो गया, लेकिन नदी में छोड़ा जाने वाला पानी पूरे दिन लगभग 9.97 क्यूमेक्स (करीब 352 क्यूसेक) पर ही स्थिर रहा। यही स्थिति अगले सप्ताह भी बनी रही।
आठ और नौ जुलाई को जलप्रवाह क्रमशः लगभग 390 और 442 क्यूमेक्स तक पहुंचने के बावजूद नदी में छोड़ा गया पानी ज्यादातर समय न्यूनतम स्तर पर ही रहा। 14 जुलाई तक भी जलप्रवाह अधिक होने के बावजूद नदी में छोड़ा जाने वाला पानी फिर लगभग 9.97 क्यूमेक्स पर लौट आया।