आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
एस्टोनिया में भारत के राजदूत आशीष सिन्हा ने कहा है कि यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) लागू होने के बाद यह देश भारत के लिए उत्तरी यूरोप के बाजारों का प्रवेशद्वार बन सकता है।
सिन्हा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा कि भारत और एस्टोनिया के द्विपक्षीय संबंध लगातार सकारात्मक दिशा में बढ़ रहे हैं और दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापार मजबूत आधार प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि भारत-ईयू एफटीए लागू होने के बाद इस आधार का उपयोग सहयोग बढ़ाने के लिए किया जा सकेगा।
सिन्हा ने कहा, “एफटीए लागू होने के बाद छोटे एवं मझोले उद्योगों के बीच जुड़ाव बढ़ेगा और एस्टोनिया के डेयरी तथा कृषि उत्पादों को भारत में बाजार मिलेगा। भारत के लिए एस्टोनिया उत्तरी यूरोप का प्रवेशद्वार होगा।”
भारत और यूरोपीय संघ ने इस साल 27 जनवरी को एफटीए वार्ता संपन्न होने की घोषणा की थी। इस समझौते के तहत भारत के 93 प्रतिशत निर्यात को 27 देशों के समूह में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने की संभावना है, जबकि ईयू से लक्जरी कार एवं शराब का आयात सस्ता हो सकता है।
भारतीय राजदूत ने एस्टोनिया की ई-रेजिडेंसी पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि कई भारतीय कारोबारी और उच्च मूल्य के उद्योगपति इस कार्यक्रम से जुड़ चुके हैं और करीब 5,000 भारतीय इसका हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा, “करीब 1,000 से अधिक भारतीयों ने ई-रेजिडेंसी कार्यक्रम के तहत अपनी कंपनियां पंजीकृत कराई हैं।”
ई-रेजिडेंसी एस्टोनिया सरकार की एक डिजिटल पहल है, जिसके तहत कोई भी विदेशी व्यक्ति ऑनलाइन तरीके से एस्टोनिया की डिजिटल पहचान हासिल कर सकता है।
सिन्हा ने कहा कि नयी और उभरती प्रौद्योगिकियां भविष्य में व्यापार का प्रमुख हिस्सा बनेंगी।
उन्होंने कहा, “डिजिटल प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), कृत्रिम मेधा (एआई) और सॉफ्टवेयर सेवाओं जैसे क्षेत्रों में व्यापक संभावनाएं हैं। एस्टोनिया और भारत दोनों ही इन क्षेत्रों में अग्रणी हैं।”