CRISIL रेटिंग्स: ECLGS 5.0 से पश्चिम एशिया संघर्ष से प्रभावित कंपनियों को समय पर मदद मिलेगी

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 16-06-2026
ECLGS 5.0 to provide timely support to firms hit by West Asia conflict: CRISIL Ratings
ECLGS 5.0 to provide timely support to firms hit by West Asia conflict: CRISIL Ratings

 

मुंबई (महाराष्ट्र)
 
CRISIL रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) 5.0 से उन कंपनियों को समय पर राहत मिलने की उम्मीद है जो पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण सप्लाई चेन में रुकावट और वर्किंग कैपिटल की ज़्यादा ज़रूरत जैसी समस्याओं से जूझ रही हैं। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि इस संघर्ष ने ग्लोबल सप्लाई चेन को बाधित किया है, कच्चे तेल से जुड़ी इनपुट लागत बढ़ाई है और ट्रेड साइकल को लंबा किया है, जिससे सभी इंडस्ट्रीज़ में वर्किंग कैपिटल की ज़रूरतें बढ़ गई हैं।
 
यह स्कीम पिछले महीने लागू हुई थी और इसका बजट 2.55 लाख करोड़ रुपये है। इससे माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) और नॉन-MSME, दोनों को मदद मिलने की उम्मीद है जो शॉर्ट-टर्म लिक्विडिटी (नकदी) की कमी का सामना कर रहे हैं। ECLGS 5.0 के तहत, योग्य स्टैंडर्ड बॉरोअर्स (उधार लेने वाले) पिछले फाइनेंशियल ईयर की चौथी तिमाही में अपनी सबसे ज़्यादा वर्किंग कैपिटल का 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त फंड ले सकते हैं, जिसकी अधिकतम सीमा 100 करोड़ रुपये है। इन लोन की अवधि पांच साल है और इसमें एक साल का मोरेटोरियम (किस्त न चुकाने की छूट) मिलता है। यह स्कीम MSME के ​​लिए 100 प्रतिशत और नॉन-MSME व एयरलाइंस के लिए 90 प्रतिशत गारंटी कवर देती है।
 
CRISIL का कहना है कि इस स्कीम की सबसे ज़्यादा मांग आठ सेक्टर से आने की संभावना है, जिनमें सिरेमिक, एयरलाइंस, ऑटो कंपोनेंट्स, डायमंड पॉलिशिंग और बासमती चावल का एक्सपोर्ट, साथ ही पॉलिएस्टर टेक्सटाइल, स्पेशलिटी केमिकल्स और फ्लेक्सिबल पैकेजिंग बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं। ये सेक्टर लागत में बढ़ोतरी और सप्लाई चेन में रुकावट से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं। एजेंसी को उम्मीद है कि इस फाइनेंशियल ईयर में उसकी रेटिंग वाली कंपनियों की वर्किंग कैपिटल की ज़रूरतें 25-30 प्रतिशत बढ़ेंगी। हालांकि, कमाई में 10-15 प्रतिशत का सुधार होने और इनपुट लागत में बढ़ोतरी की कुछ हद तक भरपाई होने की संभावना है, लेकिन वॉल्यूम ग्रोथ धीमी हो सकती है क्योंकि संघर्ष का असर और ज़्यादा दिखाई देने लगेगा।
 
CRISIL रेटिंग्स के डिप्टी चीफ रेटिंग्स ऑफिसर मनीष गुप्ता ने कहा, "हमारा मानना ​​है कि ECLGS 5.0 हमारी रेटिंग वाली कंपनियों की बढ़ी हुई वर्किंग कैपिटल ज़रूरतों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा तुरंत पूरा कर सकती है, जबकि बाकी हिस्सा फाइनेंशियल ईयर के बचे हुए समय में लेंडर्स (बैंकों) द्वारा बैंक क्रेडिट लाइन्स में अतिरिक्त बढ़ोतरी के ज़रिए पूरा किया जाएगा। इस तरह, यह स्कीम कंपनियों को अपने कामकाज में रुकावट डाले बिना अपनी अस्थायी वर्किंग कैपिटल ज़रूरतों को पूरा करने में मदद करके राहत देती है।" रिपोर्ट के मुताबिक, ECLGS 5.0 के तहत मिलने वाली अतिरिक्त मदद से रेटेड कंपनियों पर कर्ज का बोझ करीब 10 प्रतिशत बढ़ सकता है। हालांकि, CRISIL को उम्मीद है कि ज़्यादातर कंपनियों के पास वित्त वर्ष 2028 और 2029 से शुरू होने वाले कर्ज चुकाने की ज़िम्मेदारियों को पूरा करने के लिए पर्याप्त कैश फ्लो होगा।
 
CRISIL रेटिंग्स के डायरेक्टर हिमांक शर्मा ने कहा, "ECLGS 5.0 का कितना इस्तेमाल होगा, यह वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष की अवधि और तीव्रता तथा कमोडिटी की कीमतों और सप्लाई चेन पर इसके असर से सीधे तौर पर जुड़ा होगा। हालांकि निकट भविष्य में इस स्कीम पर निर्भरता ज़्यादा रहने की संभावना है, लेकिन लिक्विडिटी को आरामदायक स्तर पर बनाए रखने के लिए ऑपरेटिंग कैश फ्लो में लगातार सुधार होना बहुत ज़रूरी होगा।"
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 9 जून तक ECLGS 5.0 के तहत 48,484.26 करोड़ रुपये की लगभग 1.06 लाख गारंटी जारी की गई थीं, जो इस स्कीम के लिए शुरुआती दौर में अच्छी प्रतिक्रिया को दर्शाता है।