Defence Minister Rajnath Singh commissioned INS Mahendragiri into the Navy in Visakhapatnam
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को ‘प्रोजेक्ट 17ए’ के तहत निर्मित छठे स्वदेशी स्टील्थ युद्धपोत ‘महेंद्रगिरि’ को यहां भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े में शामिल किया। यह भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी युद्धपोत निर्माण की यात्रा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
बंदरगाह शहर स्थित नौसैनिक डॉकयार्ड में आयोजित समारोह में वरिष्ठ नौसेना अधिकारी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
पूर्वी नौसेना कमान में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा, ‘‘आईएनएस महेंद्रगिरि हवा से आने वाले खतरों, समुद्र की सतह पर मौजूद दुश्मन के जहाजों और समुद्र के भीतर पनडुब्बियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘‘ब्लू-वॉटर’ युद्धपोत के रूप में यह न केवल तट के पास, बल्कि दूर और गहरे समुद्री क्षेत्रों में भी लगातार कई सप्ताह तक तैनात रहकर भारत के समुद्री हितों की रक्षा कर सकता है।’’
मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल), भारतीय नौसेना, आईएनएस महेंद्रगिरि के चालक दल और देशवासियों को बधाई देते हुए सिंह ने कहा कि यह युद्धपोत भारत की बढ़ती रक्षा विनिर्माण क्षमता और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
करीब 6,670 टन के कुल वजन और 28 नॉट (करीब 52 किलोमीटर प्रति घंटे) की अधिकतम गति वाला आईएनएस महेंद्रगिरि एक बहुउद्देशीय स्टील्थ युद्धपोत है, जो समुद्र में कई अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है। इसमें उन्नत स्टील्थ विशेषताएं, हमलों को झेलने और युद्ध में टिके रहने की बेहतर क्षमता, रडार पर कम दिखाई देने की विशेषता तथा उच्च स्तर की स्वचालित प्रणालियां शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस युद्धपोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है। यह भारत की डिजाइन क्षमता, विनिर्माण उत्कृष्टता और देश के मजबूत होते रक्षा परिवेश को दर्शाता है।
आईएनएस महेंद्रगिरि को सतह से सतह पर मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल से लैस किया जा सकता है, जो दुनिया की सबसे तेज और घातक क्रूज मिसाइलों में शामिल है।