सामंजस्य की मिसाल: गुरुग्राम में बिना बुलडोजर चले मुस्लिम समुदाय और प्रशासन ने पेश की अनोखी नजीर

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 11-07-2026
An Example of Harmony: Muslim Community and Administration Set a Unique Precedent in Gurugram Without the Use of Bulldozers. AI photo
An Example of Harmony: Muslim Community and Administration Set a Unique Precedent in Gurugram Without the Use of Bulldozers. AI photo

 

मलिक असगर हाशमी/नई दिल्ली/गुरुग्राम

हरियाणा के साइबर सिटी गुरुग्राम से सटे सोहना क्षेत्र में इन दिनों एक बेहद सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। सरकारी और वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाइयों के बीच सोहना के वार्ड नंबर बारह से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे देश के सामने सामाजिक सौहार्द और प्रशासनिक सूझबूझ की एक अनोखी मिसाल पेश की है। अक्सर देखा जाता है कि जब भी किसी धार्मिक स्थल पर बुलडोजर चलने की बात आती है, तो कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने लगती है।

तनाव का माहौल बन जाता है। लेकिन सोहना की आईटीआई कॉलोनी में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। यहां बिना कोई बल प्रयोग किए, बिना कोई लाठी भांजे और बिना बुलडोजर चलाए करोड़ों रुपये की तीस एकड़ वन भूमि को खाली कराने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है।

इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में रहे नगर योजनाकार विभाग के डीटीपीई आरएस बाठ और स्थानीय मुस्लिम समुदाय के प्रबुद्ध लोग, जिनकी समझदारी ने एक बहुत बड़े संभावित बखेड़े को शांतिपूर्ण समझौते में बदल दिया।

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क्या था पूरा मामला और क्यों था प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती

मामला गुरुग्राम के सोहना क्षेत्र के वार्ड नंबर बारह स्थित आईटीआई कॉलोनी का है। यहां वन विभाग की लगभग तीस एकड़ संरक्षित भूमि पर पिछले कई दशकों से अवैध रूप से निर्माण कार्य हो रहे थे। इस वन क्षेत्र की जमीन पर बड़ी संख्या में रिहायशी मकानों के साथ-साथ एक मस्जिद, एक चर्च की दीवार और एक स्थानीय स्कूल के कुछ कमरों का निर्माण कर लिया गया था।

वन विभाग ने इस पूरी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने का फैसला किया। प्रशासन के लिए यह कोई सामान्य तोड़फोड़ अभियान नहीं था। कुछ समय पहले फरीदाबाद में एक धार्मिक स्थल को हटाने के दौरान भारी बवाल हुआ था। गुरुग्राम प्रशासन किसी भी कीमत पर उस इतिहास को दोहराना नहीं चाहता था।

धार्मिक स्थलों से जुड़ा मामला होने के कारण स्थिति बेहद संवेदनशील थी। जरा सी चूक बड़े सांप्रदायिक या सामाजिक तनाव का कारण बन सकती थी। इसी संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने सूझबूझ से काम लिया।

प्रशासन ने 'बुलडोजर मैन' के नाम से मशहूर और अपनी कड़क कार्यशैली के लिए जाने जाने वाले डीटीपीई आरएस बाठ को इस पूरे अभियान का ड्यूटी मजिस्ट्रेट और नोडल अधिकारी नियुक्त किया। उनके साथ वन विभाग के रेंज अफसर खजान सिंह को भी इस मोर्चे पर लगाया गया।

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आरएस बाठ की प्रशासनिक सूझबूझ और संवेदनशील पहल

आरएस बाठ को हरियाणा के मिलियन सिटी गुरुग्राम में अवैध निर्माणों पर सख्त कार्रवाई करने के लिए जाना जाता है। लेकिन उनकी एक पहचान यह भी है कि वे जितने सख्त कानूनन हैं, उतने ही व्यवहारिक जमीनी स्तर पर भी हैं।

बाठ जानते थे कि यह मामला सिर्फ ईंट-गारे के अवैध ढांचे को गिराने का नहीं है, बल्कि लोगों की धार्मिक आस्थाओं और भावनाओं से जुड़ा है। उन्होंने मौके पर जाकर सीधे भारी पुलिस बल के साथ कार्रवाई शुरू करने के बजाय संवाद का रास्ता चुना।

अभियान के पहले चरण के तहत धार्मिक और सामाजिक ढांचों को हटाया जाना था। मूसलाधार बारिश के बीच आरएस बाठ ने खुद मौके का मुआयना किया। उन्होंने पुलिस और वन विभाग की टीम को पीछे रखते हुए स्थानीय लोगों से सीधा संपर्क साधा।

उन्होंने संबंधित मस्जिद के मौलवी, चर्च के पादरी और स्कूल संचालक से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की और फोन पर भी लंबी बातचीत की। बाठ ने उनसे साफ शब्दों में कहा कि प्रशासन हर धर्म का पूरा सम्मान करता है। वे किसी भी धार्मिक स्थल पर पीला पंजा या बुलडोजर नहीं चलाना चाहते।

लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी और वन संरक्षित भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण कानूनी रूप से सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने स्थानीय लोगों और धर्मगुरुओं से अपील की कि वे कानून का सम्मान करते हुए खुद ही इस भूमि को खाली करने में प्रशासन की मदद करें।

मुस्लिम समुदाय की दूरदर्शिता और अनुकरणीय समझदारी

प्रशासन की इस संवेदनशील पहल का जो असर हुआ, उसने सबको हैरान कर दिया। ड्यूटी मजिस्ट्रेट आरएस बाठ के आग्रह को सोहना के मुस्लिम समुदाय ने बेहद सकारात्मक रूप से लिया। मस्जिद के प्रबंधकों और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने इस बात को गहराई से समझा। उन्होंने इस बात पर विचार किया कि इस्लाम में किसी दूसरे की या अवैध जमीन पर इबादतगाह बनाने की इजाजत नहीं दी गई है।

मुस्लिम समुदाय ने किसी भी तरह के विरोध, नारेबाजी या टकराव का रास्ता चुनने के बजाय बेहद परिपक्वता दिखाई। उन्होंने आपसी सहमति से यह बड़ा फैसला लिया कि वे खुद ही वन भूमि पर बने मस्जिद के हिस्से को हटा लेंगे।

इसके बाद जो दृश्य दिखा वह सचमुच अनोखा था। सोहना में हो रही तेज बारिश के बावजूद स्थानीय मुस्लिम समाज के लोग खुद आगे आए। उन्होंने अपने हाथों से उस ढांचे को हटाना शुरू कर दिया।

इस फैसले के बाद चर्च के प्रबंधकों ने भी पूरा सहयोग किया। उन्हें चर्च की अवैध दीवार हटाने के लिए बारह जुलाई तक का समय दिया गया था, लेकिन उन्होंने समय सीमा पूरी होने से पहले ही उस दीवार को खुद ढहा दिया। इसी तरह स्कूल संचालक ने भी अपने अवैध कमरों को खुद ही साफ कर लिया।

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शांतिपूर्ण संवाद से टला एक बड़ा टकराव

सोहना के प्रभावशाली और सम्मानित नागरिक जावेद अहमद इस पूरे घटनाक्रम पर कहते हैं कि अगर प्रशासन और जनता के बीच समझदारी से काम लिया जाए, तो बड़ी से बड़ी समस्याएं भी बहुत आसानी से सुलझ सकती हैं।

इस बात को खुद नोडल अधिकारी आरएस बाठ भी स्वीकार करते हैं। उन्होंने आवाज द वाॅयस से कहा कि यह शायद पूरे देश में अपनी तरह का पहला और अनूठा उदाहरण है जहां लोगों ने खुद आगे बढ़कर धार्मिक स्थलों के अवैध हिस्से को हटा लिया।

स्थानीय निवासियों का भी यही मानना है कि यदि अधिकारी संवेदनशील हों और जनता के साथ निरंतर संवाद बनाए रखें, तो स्थिति कभी नहीं बिगड़ती। आरएस बाठ के व्यवहारिक दृष्टिकोण ने सोहना को एक बड़े विवाद से बचा लिया।

वन विभाग ने इस कार्रवाई से पहले तीन बड़े कब्जाधारियों को आधिकारिक नोटिस थमाए थे और उन्हें सात दिन का समय दिया था। सोशल मीडिया पर जब यह नोटिस वायरल हुआ था, तो इलाके में हड़कंप मच गया था। लेकिन संवाद की शक्ति ने उस डर और तनाव को आपसी सहयोग में बदल दिया।

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अगले चरणों की तैयारी: अब रिहायशी और कमर्शियल भवनों पर होगी कार्रवाई

पहले चरण की यह सफलता अब आगे के अभियानों के लिए एक ब्लूप्रिंट बन गई है। वन विभाग की इस सवा एकड़ प्रमुख भूमि और कुल तीस एकड़ के दायरे में फैले अन्य अवैध निर्माणों पर अब दूसरे और तीसरे चरण की कार्रवाई की जाएगी। पहले चरण में धार्मिक और शैक्षणिक परिसरों के अवैध हिस्सों को पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से हटाकर जमीन को मुक्त करा लिया गया है।

दूसरे चरण में इसी आईटीआई कॉलोनी में वन भूमि पर बने लगभग सत्तर पक्के मकानों और बड़े कमर्शियल ढांचों को हटाने का अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा सोहना के वार्ड नंबर तेरह में हरियाणा पर्यटन निगम की भूमि पर कई दशकों से बनी पहाड़ कॉलोनी के आलीशान मकानों और कोठियों सहित ढाई सौ निर्माणों को भी इसी प्रक्रिया के तहत दायरे में लाया जा रहा है।

स्थानीय नगर परिषद प्रशासन ने पहले ही वार्ड नंबर दो के तहत गांव धुनेला में जोहड़ की सरकारी जमीन और वार्ड नंबर चार के तहत बालूदा सड़क मार्ग पर नालों के पास किए गए अवैध निर्माणों पर जेसीबी चलाकर साफ संदेश दे दिया है कि सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

लेकिन आईटीआई कॉलोनी में जो रास्ता अपनाया गया, उसने यह साबित कर दिया है कि कानून का पालन बिना किसी कड़वाहट के भी कराया जा सकता है। सोहना की यह घटना आज के दौर में सामाजिक सद्भाव, आपसी समझ और प्रशासनिक सूझबूझ का एक बेहतरीन और अनुकरणीय उदाहरण बन गई है।