आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने बुधवार को कहा कि सीमा शुल्क विभाग को लागत घटाने और भरोसेमंद करदाताओं के साथ प्रत्यक्ष संपर्क कम करने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई), मशीन लर्निंग और रियल-टाइम एनालिटिक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ाना चाहिए।
सीमा शुल्क विभाग के लिए अगले दशक में अपनाए जाने वाले पांच प्रमुख स्तंभों की रूपरेखा पेश करते हुए चतुर्वेदी ने कहा कि सीबीआईसी का लक्ष्य एक ‘‘एकीकृत, भरोसेमंद करदाता तंत्र’’ तैयार करना है, जिसमें कारोबारियों द्वारा माल एवं सेवा कर (जीएसटी), सीमा शुल्क और अन्य अप्रत्यक्ष करों के भुगतान में लगातार अनुपालन का रिकॉर्ड हो। इससे अप्रत्यक्ष कर विभाग में बेहतर तालमेल संभव हो पाएगा।
सीबीआईसी प्रमुख ने सीमा शुल्क विभाग से एमएसएमई को मार्गदर्शन देने और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का भी आह्वान किया, ताकि छोटे कारोबारी एलिजिबल मैन्युफैक्चरर इंपोर्टर (ईएमआई) जैसी सीमा शुल्क के भुगतान को टालने की योजनाओं तथा अधिकृत आर्थिक परिचालक (एईओ) का लाभ उठा सकें।
चतुर्वेदी ने कहा कि प्रौद्योगिकी को सीमा शुल्क के लिए ‘‘बड़ा मददगार’’ बनना चाहिए और एईओ के रूप में पंजीकृत कारोबारियों के लिए लगभग बिना प्रत्यक्ष हस्तक्षेप और लगभग कागज रहित व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ना लक्ष्य होना चाहिए।