अदालत ने कूड़ा बीनने वाले नाबालिग से कुकृत्य के दोषी की सजा बरकरार रखी

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 14-08-2026
Court upholds sentence of man convicted of raping minor ragpicker
Court upholds sentence of man convicted of raping minor ragpicker

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 11-वर्षीय बेघर बच्चे से कुकृत्य करने के आरोपी की दोषसिद्धि में हस्तक्षेप करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि सड़कों पर गुजारा करने वाले बच्चे से तारीख, समय या कपड़ों का विवरण उतना सटीकता से देने की उम्मीद नहीं की जा सकती जितनी कि एक व्यवस्थित माहौल में रहने वाले गवाह से की जाती है।

आरोपी की याचिका पर 10 अगस्त को पारित फैसले में न्यायमूर्ति चंद्रशेखरन सुधा ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 377 (कुकृत्य) और पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम की धारा-छह (गंभीर रूप से यौन हमला) के तहत उसे दोषी ठहराने संबंधी निचली अदालत के अगस्त 2025 का निर्णय बरकरार रखा।
 
हालांकि, न्यायाधीश ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई 20 साल जेल की सजा को घटाकर 10 साल कर दिया। इस बारे में अदालत ने यह आधार दिया कि अपराध के समय इस कुकृत्य के लिए 10 साल की सजा का प्रावधान था।
 
पॉक्सो अधिनियम की धारा-छह के तहत न्यूनतम 20 वर्ष की सजा का प्रावधान 16 अगस्त 2019 से लागू हुआ था।
 
नाबालिग ने आरोप लगाया था कि नवंबर 2016 में जब वह कश्मीरी गेट स्थित रेलवे पुल के नीचे सो रहा था, तब आरोपी ने उसका यौन उत्पीड़न किया।
 
जब नाबालिग ने क्षेत्र में बेघर लोगों को मुफ्त चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित करने वाले कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं को घटना की जानकारी दी, तो उन्होंने पुलिस हेल्पलाइन पर इसकी सूचना दी थी।
 
आरोपी के वकील ने दावा किया कि उसे फंसाया गया है और दलील दी कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि लड़के की उम्र 12 वर्ष से कम थी।
 
उन्होंने यह भी कहा कि घटना के समय लड़के ने जो कपड़े पहने थे, उन्हें लेकर उसके बयान में कई विरोधाभास थे।