आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली पुलिस से कहा है कि वह एक महिला वकील पर कथित तौर पर उसके पति द्वारा किए गए क्रूर हमले की जांच जल्द से जल्द पूरी करे और साथ ही पीड़िता तथा उसके बच्चों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करे।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि पुलिस यह सुनिश्चित करे कि जांच निष्पक्ष, तटस्थ और बिना किसी पूर्वाग्रह के की जाए।
उच्चतम न्यायालय ने पिछले महीने स्वतः संज्ञान लिया था, जब अधिवक्ता स्नेहा कलिता ने मामले में तत्काल हस्तक्षेप और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) की पीड़ित मुआवजा योजना के तहत मुआवजा देने का आग्रह करते हुए प्रधान न्यायाधीश को एक पत्र लिखा था।
आरोपों के अनुसार, कड़कड़डूमा जिला अदालत में वकालत करने वाली महिला अधिवक्ता पर 22 अप्रैल को सोनिया विहार में उसके पति ने तलवार से हमला किया था।
पीठ ने 11 मई को मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा था कि पुलिस द्वारा दाखिल स्थिति रिपोर्ट के अनुसार प्राथमिकी में जांच अभी जारी है।
पीठ ने कहा, ‘‘हम जांच अधिकारी को निर्देश देते हैं कि वह जांच जल्द पूरी करके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने का प्रयास करे।’’
उसने कहा, ‘‘दिल्ली पुलिस यह सुनिश्चित करे कि पीड़िता और उसके बच्चों को कोई नुकसान न पहुंचे तथा उन्हें पर्याप्त सुरक्षा दी जाए।’’
न्यायालय ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि पीड़िता की बेटियों को प्ले-स्कूल और नियमित स्कूल सहित सभी सुविधाएं नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएं।
उसने कहा कि स्कूल फीस, यूनिफॉर्म, किताबें, सार्वजनिक परिवहन आदि सहित सभी खर्च दिल्ली सरकार का शिक्षा विभाग वहन करेगा।
पीठ ने कहा, ‘‘बालिकाओं को दिल्ली सरकार की नीति के अनुसार छात्रवृत्ति, मानदेय या वित्तीय सहायता भी दी जाए।’’
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि 27 अप्रैल के आदेश के अनुसार दोनों बेटियां पहले अपने दादा-दादी के पास थीं और बाद में बाल कल्याण समिति ने उन्हें अपनी अभिरक्षा में ले लिया था।