आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने बुधवार को कहा कि यौन अपराधों की व्याख्या करते समय अदालतों को केवल शारीरिक कृत्य को आधार नहीं बनाना चाहिए, बल्कि पीड़िता की गरिमा, उसकी सहमति और घटना से उसके मन में पैदा हुए भय को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।
रहाटकर की यह टिप्पणी पटना उच्च न्यायालय के उस फैसले के बाद आयी है, जिसमें मीडिया में आयी खबरों के अनुसार अदालत ने कहा था कि किसी महिला की सलवार उतारने की कोशिश करना और उसकी छाती को दबाना बलात्कार के प्रयास की श्रेणी में नहीं आता।
रहाटकर ने कहा, ‘‘यौन अपराधों की व्याख्या करते समय ध्यान केवल शारीरिक कृत्य तक सीमित नहीं होना चाहिए। पीड़िता की गरिमा, उसकी सहमति, घटना के समय उसने जो भय महसूस किया और उसे पहुंचे मानसिक आघात को भी समान रूप से महत्व दिया जाना चाहिए।’’
एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष ने कहा कि न्याय का उद्देश्य केवल कानून की तकनीकी व्याख्या तक सीमित नहीं हो सकता।